X बराबर मान लो

X Barabar Maan Lo  by Pahadi blogger

X बराबर मान लो (X BARABAR Maan Lo)

मंगतू बच्चपन से ही स्वभाव से बहुत चंट चालाक था पर पढ़ाई में दौर-दौर का था खासकर साइंस में, गंणित में जितना नदी पार था उतना नदी के इस तरफ भी, मतलब की गणिंत उसके स्कूली जीवन में एक लकड़ी के सांगल (पुल) की तरह था बस उससे नदी पर हो जाए यही मकसद था, पर कला के विषयों में अच्छा खासा सग्वोर था. कहते हैं कि कक्षा पांचवी से लगातार कक्षा 10 तक मंगतू को गणिंत विषय में सबसे ज्यादा कूटा गया, क्योंकि उसने सब की मानी पर कभी X बराबर मान लो (X Barabar Maan Lo) वाली बात जिंदगी में अपने गणिंत के अध्यापक की नहीं मानी, इमोशन के चक्कर में आकर गुरजी उसको हर बार पास कर लेते थे, पर एक बात हमेशा कहते थे तुझे यहाँ तो पास कर दिया पर कक्षा 10 में भगवान ही तुझे बचा सकता है, ये बात एक दिन उसके गणिंत वाले अध्यापक ने उसके पिताजी को भी बताया कि आपके बच्चा गणिंत में कमजोर है अब तो मैं भी हार गया हूँ, देखो अगर उसको गणिंत का ज्ञान नहीं होगा तो आगे भविष्य मुश्किल हो जायेगा, बाकी सब की मान रहा है पर मेरे विषय में X की नहीं मानता आखिर X से उसको समस्या क्या है, …………,…………………….!

पिताजी भी बड़े दुखी हो गये कि आखिर ये X की क्यों नहीं मानता, घर आये तो रात को उसकी माँ से कहने लगे कि गुरुजी ने कहा है कि आपका बच्चा गणिंत विषय में कमजोर है, और बाकी सब विषय में ठीक है बस न जाने क्यूँ मेरे विषय में X की नहीं मानता, माँ ने कहा किसने कहा मेरा बच्चा कमजोर है इतना घी दूध घर का खाना खिलाती हूँ कमजोर होगा वो मास्टर और मेरा बेटा है वो X की क्यूँ मानेगा मेरी मानेगा जिसने इतने प्यार से पाला पोसा है, उसके साथ के सभी बच्चे गणिंत में अग्रणी थे बस वही एक अपवाद था, मंगतू बच्चपन से ही जब ABCD में हमेशा X को मिस कर जाता था वो उसको भूल जाता था और Y के बाद सीधे Z का उच्चारंण करता था उसको X से च अजीब सी चिड़ थी और काफी चिड़चिड़ा पन X को सुनकर उसको चेहरे पर दिखता था. मंगतू एक अबोध बालक था पर वो नहीं जानता था कि X को न मानना उसके जिंदगी का सबसे बेहतरीन निर्णय था, पर जैंसे तैंसे वो 33 नंबर से गणिंत विषय में पास हो गया और दसवीं के बाद उसने सांइस का मोह त्याग दिया उसे एैंसा लगा मानो जैंसे आज ही कबूतर पिंजरे से छूटा हो और एक खुला आसमान उसका इंतजार कर रहा हो, उसके केवल गणिंत में नंबर कम थे बाकी सभी में अच्छे खासे नंबर थे. जब उसने बारवीं पास की तो वो शहर आ गया पढ़ने और पिताजी ने उसे होस्टल में रख दिया, कॉलेज का होस्टल लड़कियों के होस्टल से दूर था मगर रास्ता आने जाने का वहीं था, कुछ दिन होस्टल के दोस्तों के साथ घुलने मिलने में लगे और फिर क्या था रोज शाम को वो भी होस्टल की खिड़की पर बैठने लगा,…………..:…………!

दिखने में हेंडसम था पर प्यार प्रेम में फटू था लड़कियों से बात करने में उसके गात में तथराट होता था इसलिए उनसे दूर रहता था पर, क्लास में भी ज्यादा बात नहीं करता था लड़कियों से, पर यहाँ भी X ने उसका पीछा नहीं छोड़ बस दूसरे रूप प्रकट हो गया अक्सर बीकम X वाली बात नहीं माननी पढ़ती है क्योंकि यहां X अपने साथ एक दो वैल्यू साथ में जरूर रखता है, पर मन ही मन बहुत चिड़ता था, एक दिन हौस्टल की खिड़की पर खड़ा था और उसके कुछ सीनियर भी थे लड़कियां होस्टल से आ रही थी तभी एक सीनियर ने अपने साथी को कहा देख तेरी X आ रहा है, मंगतू बात नहीं समझ पाया कि ये लड़की को X क्यों कहा, पर उसने ज्यादा क्लास की तरह यहां भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ना ही सीनियर से जानने की कोशिश की, रेंगिग का दौर भी ता थो डर भी था, जब पहले सेमेस्टर के तीन महीने बीते तो क्लास की एक लड़की मंगतू के करीब आने की कोशिश करने लगी वो भी होस्टल में रहती थी तो क्लास भी एक थी, जानबूझकर क्लास में कभी उसके आगे तो कभी व कभी कभी बराबर वाली सीट में बैठने लगी, पर शुरू शुरू में मंगतू बिलकुल भी बात नहीं करता था, पर लौंडा कबतक खुद को सख्त रखता एक ना एक दिन घी पिघलता ही है, और दोस्तों की यारी दोस्ती देखकर उसके दिल के द्वार भी खुलने की कोशिश करने लगै आखिर एक दिन हौस्टल आते वक्त उसने साहस करके उसे दिल की बात कह दी, पर यहां लड़की अब भाव खाने उसने उससे कहा की मैं एैंसी वैंसी लड़की नहीं हूँ, पर वो जानबूझकर एैंसे कहने लगी दो चार दिन तक ये सिलसिला चलता रहा आखिरकार एक हफ्ते की रस्साकशी के बाद वो मान गई। ………………………………….

धीरे धीरे कॉलेज साथ आना जाना हुआ, कैंटीन में भी साथ उठना बैठना हुआ, नोटस शेयर होने लगे, रातों को नींद सुहानी होने लगी, अच्छा खासा लाटा इंसान मंगतू बेबी बनके रह गया, रविवार को शहर की फेमस जगह पर घूमना हुआ तब सेल्फी का ऐंसा क्रेज नहीं था, नौरमल फोटो ही पिक करते थे, एक दूसरे पर मर मिटने वाली बातें होने लगी, अब तो पहला और दूसरा सेमेस्टर प्यार नोट्स और इंटरनल इक्जाम की तरह कब बीत गया पता ही नहीं चला,पहले साल की छुट्टियाँ खत्म होने पर जब दोनो एक महीने बाद फिर मिले तो मंगतू की खुशी का ठिकाना न रहा, आखिर बंसत के आने पर हर कोई खुश रहता है, आंखो में इश्क का तूफां छाया हुआ था आज पर मंगतू इश्क में भी लाटा रह गया, जैंसे मंगतू उससे मिला तो उसने मंगतू को कहा कि देख अब हम मिल नहीं सकते मैं तुम्हारी सिर्फ एक दोस्त हूँ तुम भी अब मुझे एक दोस्त ही समझो. मंगतू उसके कहने का मतलब समझ नहीं पाया पर मंगतू ने कहा कि हम दोनो तो एक दूसरे को चाहते हैं इतने में उसने कहा चाहते थे पर अब नहीं,,,, फिर क्या था मंगतू की आंखे भर आ गई, उसने उस दिन क्लास भी नहीं गया, अपने होस्टल आया तो दोस्त को बात बताई फिर दोस्त ने गम मिटाने की दवा लाया ठेके से और रात को सब साथ छत पर जाकर अनाब सनाब बकने लगा, अब क्लास में मंगतू पीछे की सीट पर बैठने लगा, मंगतू ने देखा कि उसके नैन मटके क्लास के किसी और से मिल रहे हैं, मंगतू से ये देखा ना गया कॉलेज के बाहर जब मिला तो खूब कूटा उसको भी, अब दूरियां और बड़ गई,

एक दिन मंगतू अपने होस्टल की खिड़की पर खड़ा था, वो भी अपने होस्टल से कहीं और जा रही थी, तभी साथ वाले एक लड़के ने जोर सि कहा मंगतू देख तेरी X जा रही है, जैंसे मंगतू ने “X” सुना वो कमरे में चला गया सोचने लगा और मन ही मन कहने लगा कि आज समझ में आया कि X बराबर क्या होता है. ये वही X जिसने मुझसे मेरा बच्चपन भी छीना और अब एक तमगा कॉलेज लाईफ में X का मुझ पर लग गया, मतलब कि X की सही वैल्यू वो होती है जो आजतक किसी की नहीं हुई इस वैल्यू ने आजतक किसी की वैल्यू नहीं समझी, इसीलिए शायद गुरुजी कहते थे कि X मन लो काश वो गुरुजी वाला X मान लिया होता तो आज ये वाला X जिंदगी से नहीं जुड़ता,

लेख:- हरदेव नेगी

5 thoughts on “X बराबर मान लो”

  1. हाहाहा,,बहुत शानदार,,ये X तो कभी पीछा ही न छोड़े,,शायद हर लड़के की कहानी कह डाली जिसने कभी x की मानी ही नहीं 😂😁

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