Hindi Kavita

कुछ एैंसी है गुप्तकाशी

सूरज की पहली किरणों संग, नयन भिगोते जहाँ के वासी. नीस जिसके बहती मंन्दाकिनी, वही नगरी है गुप्तकाशी. भोले बाबा के जयकारों से, गूंज उठती… Read More »कुछ एैंसी है गुप्तकाशी

इक बदली जब बदली – हिंदी कविता

इक बदली जब बदली, भला ये हवा कैंसे बदली.  पात पेड़ों के टूटे नहीं, केसू उनके उड़े नहीं. इक………….. कैंसे बदली। पंख फैलाये बैठे हैं, … Read More »इक बदली जब बदली – हिंदी कविता