Garhwali Poetry

कुछ तुमुन

कुछ तुमुन फरकै, कुछ मि फरकोलु. कुछ तुमुन सनकै, कुछ मि सनकोलु. कुछ तुमुन चितै, कुछ मि चितोलु. कुछ तुमुन बिंगै, कुछ मि बिंगोलु. कुछ… Read More »कुछ तुमुन

सौंगू दिख्येदूं

सौंगू दिख्येदूं पर ठुक एैंच आगास चा, ये गौं का बाटा कु……….! पय्यां डालि किलै सूख्यूं चा……….। घस्येनू कु आढासु छों जैंका छैल् स्कूल्या दगड़यूं… Read More »सौंगू दिख्येदूं

गढ़वाली कविता “टेक्वा”

मेरि जिंदगी कु घाम अच्छलांण लैग्ये। अंधेर संगती बिंरयूं चा, उंदार तरीक उकाल छौं जांणू। अब ये टेक्वा कू सारू चा. नांगा खुट्यों हिट्यूं मि… Read More »गढ़वाली कविता “टेक्वा”