Garhwali Poem

ऋतु बोड़ीगे

ऋतु बोड़ीगे चौमासा, डांडयों बासिग्ये हिलांसा. रौड़ी दौड़ीक् सार्यूं बीच, मैनू एैग्ये बल चौमासा. नैल्ये गोडें मा लगि भग्यान, क्वोदा झंगोरा कि सार्यूं मा. बरखा… Read More »ऋतु बोड़ीगे

अन्वार

स्वांणी मुखड़ी फ्योलीं जन चार। कजर्याली आंखी जन ब्वे की चार। जिदेर जिकुड़ी अर् बालू मन। सच्ची ब्वोला! कैंकि ह्वेली ईं पर अन्वार।    … Read More »अन्वार