सफेद रिबन के फूल -Safed Riben ke Phool

safed riben ke phool written by hardev negi

सफेद रिबन के फूल -Safed Riben ke Phool

Safed Riben Ke Phool  पता नहीं क्यूँ उस दिन खाखी पैंट, नीली कमीज व काले रंग के पीटी सूज पहनकर अलग सी खुशी हो रही थी, एैंसा लग रहा था मानो जैंसे दुनिया की सारी खुशी मिल गई हो, जुलाई के महीने में राजकीय इंटर कॉलेज का पहला दिन कुछ खास होता है, माँ ने दो दूध के डब्बे रखे हुए थे जिन्हे स्कूल जाते वक्त जिन कर्मचारियों के यहाँ दूध लगा रखा था वहाँ भी पहुंचाना होता था, गाँव की धार में सब गाँव लड़के व लड़कियां इकट्ठा होकर अब चलने लगे, सभी बहुत खुश थे कुछ छोटे भुले और भुल्लियां रो भी रहे थे कि “मैं नी जांणू स्कूल” उनके दादा और दादी ने कंडाली भी रखी थी तो “पान पराग” टौफी भी रखी थी, गाँव के उबड़ खाबड़ रस्तों पर बूड़े दादा दादी जब उनको संभाल नहीं पा रहे थे तो गाँव के कुछ लड़के उनको कंधे पर रखकर स्कूल ले जा रहे थे, और डरा भी रहे थे, माताओं ने नन्हें बच्चों के टिफिन बाक्स मैं लकड़ी के चूल्हे में बनी रोटियां रखी थी उन पर राख भी चिपकी थी साथ में हरी भुज्जी, गुड़ हि रखा था कोई माडर्न खाना नहीं था, उनके दादा दादी आधे रास्ते तक ही छोड़ने आये थे गाँव के लड़के ही उनको स्कूल छोड़ देते थे, दूध देकर अब स्कूल की तरफ कदम और तेज होने लगे, इंटर कॉलेज की 7:00 बजे दूसरी घंटी बज चुकि थी प्रार्थना शुरू होने में बस 15 मिनट शेष थे, साथ में कुछ गुरुजी पैदल तो जो दूर से थे वे चेतक स्कूटर से आ रहे थे, Good Morning की जगह गुरुजी व बहनजी प्रणाम जैंसे आदर शब्द सबके जुबान पर थे, अलग- अलग गाँव के लड़के लड़कियां फील्ड में इकट्ठा हो रखे थे, तीसरी घंटी भी बज चुकी थी और प्रार्थना शुरू करने के लिए लाईन में लगने शुरू हो गये थे

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एक सार्जन और पाँच लड़कियां प्रार्थना के लिए आगे खड़े थे, सरस्वती वंदना शुरू होते ही सबने आंखे बंद कर ली थी, जैंसे ही दूसरी प्रार्थना शुरू करने के लिए सार्जन ने कहा सबकी आंखे खुल चुकी थी, आंखे खुलते ही सबसे पहले नजर सामने प्रार्थना बोल रही पाँच लड़कियों में से एक पर पड़ी तो आंखे उसे ही देखते रह गई, सफेद सलवार, नीला कुर्ता, कौटन का सफेद दुपट्टा और दुप्पटे पर लगा “सदन का बैज” व लटुल्यों पर सजे “सफेद रिबन के फूल” (Safed Riben Ke Phool)  और हाथों रुमाल पकड़ा हुआ था, अहा जिकुड़ा में अलग ही मौल्यार खिल रहा थे, दूर हिमालय से चल रही सुर-सुर्या बथौं उसकी लटुल्यों को उड़ा रहे थे एैंसा लग रहा था मानो जैंसे तुंगनाथ की तलहटी पर खिले सफेद बुरांस के फूल बर्फीली हवाओं से उड़ते अलग ही छठा बिखेर रहे थे, ना कोई मेकअप ना कोई रंग बिरंगी नेल पौलिस ना ही लटल्यों को सट्रेटनर से स्ट्रेट किया हुआ बिलकुल साधारण रूप में जो अन्वार छलक रही थी सच कहूं तो नेगी जी के गीत कंठ कलश पर उतर रहे थे “सच माना न माना वींकी पच्छांण कुछ हौरी छयी” हाथ जोड़े हुए जब वो प्रार्थना गा रही थी “वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें” बस उसके बाद पंक्ति में पांचवे नंबर पर खड़ा मंगतू भी हाथ जोड़े हुए उसे डट कर देखने का कर्त्तव्य निभा रहा था, हाथ जोड़े एैंसा लग रहा था जैंसे दोनो एक ही चीज मांग रहे हों दूसरी तरफ पीटीआई गुरुजी डंडा लिए घूम रहे थे, अनुशासन के मामले में सख्त थे बच्चों को खूब कूटते थे और कूट भी रहे थे खासकर उनको जो चप्पल व दूसरे रंग बिरंगे जूते या फिर कॉलेज की यूनिफार्म में नहीं थे, कूटकर उनको लाईन में अलग किया जा रहा था, प्रधानाचार्य खूब लंबे चौड़े थे उनको देखकर आधा से ज्यादा छात्र छात्राओं की जिकुड़ी बिरळी जैंसे बनी रहती थी खासकर सांइस व उनके गाँव के लड़के, पीटीआई और प्रधानाचार्य की मार से लड़कों में लराट मच जाता था, प्रार्थना खत्म होते ही प्रधानाचार्य के नये सत्र की शुभकामनाएं व अनुशासन तथा विद्यालय की गरिमा बनाये रखने की हिदायत तो पीटीआई गुरुजी ने विद्यार्थी के रूप में विद्यालय आने की किसी भी प्रकार का सलमान खान, अजय देवगन अक्षय कुमार कॉलेज में नहीं चलेगा वरना डंडे से सीधा कर दिया जायेगा क्योंकि तब माता पिता के बाद गुरु का हक्क बनता था कि वो बच्चे को सुधारे जोकि अब नहीं है, ,……… …………………….!……………!

सफेद रिबन के फूल (Safed Riben ke Phool)

Safed Riben Ke  Phool :- अब रोज की तरह आना जाना टकटकी शुरु हो गया, आफटाईम मैं तो विद्यालय की पानी की टंकी सामने बैठकर दगड़यों संग मौज मस्ती तो कुछ उछाती लड़के लोगों के आड़ू पुलम नासपाती चोरते थे, वहीं कहीं ये निरभगी आंखे उसके भी खोजती थी, जुलाई मध्य में ही विद्यालय में नये छात्रों को उनके सदनों में विभाजित करना शुरु हो गया था जैंसे कि “इंदिरा सदन, भाभा सदन” गायत्री सदन” लक्ष्मी बाई व ध्यानचंद्र जैंसे सदन की नेमप्लेट अनुक्रमांक के हिसाब से बटने लगे” यहां किस्मत भी साथ दे गयी, मंगतू और उसका सदन एक ही था, सदन इसलिए बनाये जाते थे ताकि 15 अगस्त या फिर किसी और राष्ट्र पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम सदन के हिसाब से कराये जा सके और हर सदन का प्रतिनिधित्व गुरुजी करते थे, मंगतू ने NCC में भी भाग लिया था जोग एैंसा कि कईं बार जिस पर टकी टकी लगी रहती थी उसकी क्लास के सामने फिल्ड में हवलदार मुर्गा बना देता था फिर उठक बैठक करा देता था, उधर 15 अगस्त की तैयारी शुरू हो गई थी, मंगतू पीछे के दरवाजे से लड़कियों का डांस छुपके से देखने की कोशिश कर रहा था कि तबतक उसकी नजर पड़ गई और मंगतू वहां से भाग गया क्योंकि पीटीआई की सख्त हिदायत थी कि कोई भी लड़का लड़कियों की कक्षाओं में डांस देखने की कोशिश नहीं करेगा अगर पकड़ा गया तो प्रार्थना सभा में सबके सामने कूटा जायेगा, पर NCC वालों की अलग तैयारी हो रही थी, पर मंगतू कोई ना कोई बहाना एैंसा ढूँढ लेता था कि जिससे उसकी डांस प्रैक्टिस की झलक देख सके बस क्लास में जाना था, 15 अगस्त के दिन विद्यालय से रैली निकल गई और बाजार की ओर प्रस्थान करने लगी विद्यालय के सबसे उछाती लड़के लड़कियों की लाईन के आगे खड़े किये गये क्योंकि ये लड़के या तो गोल हो जाते थे या फिर कुछ ना कुछ ऊटपटांग नारे लगा देते थे, इसलिए उनको लड़कियों के आगे खड़े किये गये साथ में हिंदी व भुगोल के गुरुजी रखे गये, जिससे की कोई शरारत न करें और नारे लगातें रहे ” नारे लग रहे थे कि “देश की रक्षा कौन करेगा” -सभी छात्र छात्रायें चिल्ला रहे थे कि “हम करेंगे- हम करेंगे” पीछे लड़कियां आगे लड़के, हिंदी के अध्यापक ने एक लड़के से पूछा “कहाँ है देश किसकी रक्षा करोगे ? लड़के ने लड़कियों की लाईन को ओर हाथ का इशारा किया और कहा कि गुरुजी ये है देश” और हम इसकी रक्षा करेंगे, फिर क्या था बीच बाजार में ही गुरुजी ने कूट दिया.

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एक तरफ गुरुजी की मार की डर दूसरी तरफ मंगतू को दिल की बात कहनी थी पर साहस की पूरी कमी चेहरे पर झलक रही थी, मंगतू को डर था कि कहीं वो गुरुजी के पास मेरी शिकायत न कर दे, बेइज्जती हो जयेगी स्कूल के सामने, आखिरकार एक दिन बड़े साहस के दम पर मंगतू ने एक कागज पर दिल की बात रख कर ठुस करके उसके बैग में रख दिया, शायरी भी उसमें गजब की लिखी थी कि :

बल मेरा रंग सूखा, रूप सूखा पढ़ना लिखना लग गया भूल,
मन लूछ जाते हैं बल तुम्हारी लटुल्यों के सफेद रिबन के फूल।
अब दिल तुम पर आ ही गया, लाइफ कर दो मेरी कूल,
बल रोज तुमको देखने आता हूँ मैं स्कूल।।

“तुम्हारा मंगतू”

आफटाइम के बाद जैंसे लड़की ने बैग खोला और उसमें पड़ा कागज खोला तो उसको पढ़कर रोने लगी, और सीधे प्रधानाचार्य के कक्ष में चली गई, और प्रधानाचार्य जी ने जैंसे ही कागज पढ़ा तो मुहब्बतें वाले अमिताभ बचन की तरह गुस्सा हो गये, और लड़की को समझाया और कहा तुम चिंता मत करो, ये हमारे विद्यालय की परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन के खिलाफ़ है,।कल सुबह प्रार्थना के इसके मंगतू के अंदर का देवदास बाहर आ जायेगा, उधर मंगतू को पता नहीं था कि वो प्रधानाचार्य के पास गयी है, फिर भी मंगतू डर के साये में जी रहा था, अगली सुबह जब मंगतू स्कूल पहुँचा तो उसे देखने लगा पर वो कहीं दिखी नहीं है, प्रार्थना स्थल में जैंसे ही प्रार्थना खत्म हुइ पहले पीटीआइ ने जो पूरी डिरेस में नहीं थे उनको सेका, फिर जो कल घंटी गोल कर गये थे उनको मुर्गा बनाया, उसके बाद जैंसे ही प्रधानाचार्य ने कहां मंगतू कहां है, आगे आये, मंगतू आगे गया, और प्रधानाचार्य ने कहा कि ले ये शायर जोर से पढ़, जैंसे मगतू ने शायर पढ़ा सबके सब हसने लगे, पर मंगतू थतराने लगा, इसके बाद क्या था प्रधानाचार्य ने मंगतू के पिछे के दो फूल सुजा दिया डंडे से,
और कहा आशिकी चड़ रही है, पढ़ाइ में मन नहीं लगता, मैने कॉलेज के पहले दिन ही कहा था कोइ शाहरुख खान और अक्षय कुमार विद्यालय में नहीं चलेगा, इसी लिए भेजा तेरे माता पिता ने तुझे पढ़ने के लिए। विद्यालय का नाम बदनाम करते हो, इससे अच्छा खेल कूद पढ़ाइ में आगे बढ़ो तुम यहां शायरी लिखने आते हो, मंगतू की मुखड़ी बुरांस के फूल की तरह लाल हो गयी और मंगतू ने जैंसे तैंसे पिढ़ा सारी, और मंगतू के दिल से इश्क का ख्याल बरसाती गदेरे की तरह बह गया, प्रधानाचार्य ने उसको एक सजा और दी, कि कल से तुम सर्जन रहोगे और सावधान विसराम और हिंदी अंग्रेज़ी दोनों में प्रतिज्ञा भी सुनाओगे, प्यार की लीडर शिप के चक्कर में कॉलेज की लीडरशिप निभानी पढ़ गई मंगतू को,
उधर जैंसे सब कक्षाओं की ओर प्रस्थान करने लगे, लड़के मंगतू को चिढ़ाने लगे, मंगतू गुस्से से भरी नजर से देखने लगा, अंदर ही अंदर मंगतू बुरा फील करने लगा, मंगतू के लाटेपन के खातिर उसने उसका भी लाटापन नहीं समझ पाया, मंगतू को क्या पता था कि वो सीधे प्रिसिंपल के पास चली जायेगी और पहले ही राउंड के खत में मंगतू का दिल क्लीन बोल्ड कर देगी,

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मंगतू का इश्क और सफेद रिबन के फूल को तोड़ने रिस्क ना झेल पाया, शायद कभी कबार कुछ माया लाटी ही रह जाती हैं वो बोल नहीं पाती कुछ बिंगा नहीं पाती,

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बस एक उसी खाकी पैंट और नीली कमीज को पहनकर कॉलेज जाना अर जब भी उसकी अन्वार दिखे खुद नजरे झुका देने का सिलसिला जारी रहा। और आखिर में छुट्टी के समय कॉलेज गेट पर मंकी भैंट उससे हुइ तो, मंगतू ने फिर एक शायरी मार दी:-

बेवफा तेरा मासूम चेहरा
सुबेर सुबेर देखने लायक नहीं है,
स्वांणी तो बहुत है मगर तू
दिल लगाने के काबिल नहीं है

लेखक :- हरदेव नेगी
फोटो:-  रविन्द्र सिंह रावत

 

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