Village Panchayat Quarantine Series – Quarantine Ya Sweelintine (क्वारनटीन या स्वीलीटीन)

 Panchayat Quarantine Series – Quarantine Ya Sweelintine (क्वारनटीन या स्वीलीटीन)

जब से पंचैत भवन में क्वारनटीन (Hybrid / Home Quarantine) हुआ हूँ तब से गौं की दादियों ने अलग ही माहौल व मतलब बना रखा है क्वारनटीन भवन का, और एक लिख्वार मनखी अगर गाँव के पंचैत भवन में क्वारनटीन हो जाये तो लिखने का विषय और माहौल गौं की दादियों से मिल जाता है, “गौं की दादियों की छ्वीं जैंसे कोदा की ध्वीं” बस जब जिकुड़ा लग जाती है तो व्हौंदा खांदा मनखी भी इमोशन से भर जाए, अर् छ्वीं भी काल-काल की दादी के मुख से निकलनी शुरू हो जाती है, क्योंकि दादी ने दुखों की कुट्यारी भी पैंणों की तरह अपने पागुड़े पर बांध रखी रहती है, बस इमोशनल वाला सीन दादी के सामने आ जाये फिर “यंरा देबो प्वोर परार भी यन्न कल बरखि छो बल”

 

अब हुआ यूं कि क्वारनटीन के पहले दिन पंचैत भवन में व्यखुनि के बगत मैं छत में घूम रहा था पास वाले खेत में दादी धांण करने आ गई दादी ने जैंसे मुझे देखा भट्याने लग गई,

दादी -बल ऐ नाती ठिक चा लाटा तू?
मैं – हां दादी ठीक छौं मि, तुमरू सरील परांण भी ठिक चा?

दादी :- यरां म्यारा सरील क्या होंण नाती, मरेणूं भी नीच, जरा यख पुंगड़ फुंड एै छो बल् ग्यौं काटी सकलिन बल् भ्वोल परस्यों यख क्वोदू बूतणं बल, तब मिन स्वोची जरा द्वी चार घासै मुट काट दयूं तब, तु यखुलि एै दिल्ली बटि घौर कि क्वे होर भि एै?

मैं– यखुलि एैयूं दादी,

दादी – ठिक करि त्वैन जु घौर एैगी, कन्न काल लगि एैंसू का साल ईं दुन्या पर, टीवी मा देखि म्येन क्या रौवा रौं पड़यूं बल्, क्वै पैदल बटा लग्यूं, उल्टी पल्टी लोग अपड़ा घौरू औंणा छन्न बल्, सि म्यारा मैती भि छा बल परदेशू फुंड सि भि नि एैन घौर,😥😥😥 तब ज्यै करला सि, फुंड त्वैब घौर औंदा त् जरा सरील हल्कू ह्वे जांदू,😇😇 पर हे नाति त्येरू खांणों घौर बटि औंणू कि यखि बटि।

मैं– बल दादी सुबेर ब्याखुनि घौर बटि अर दोफरा मा मैं खुद बणौंदू, कति धौं रोड़ दोड़ कन्न,

दादी – ठिक करि नाति त्वैन, पर अफू भी खांणि प्येंणी कमि नि करि, चौंदह पंद्रह दिन खूब खै पी ल्ये कमि ना करि, सरील कखि कमजोर नि ह्वो, बल

मैं –  ना – ना दादी खांणैं कमी नि, बगत पर सब औंणू चा

दादी – अर् सुबेर पांणी बल्टी भौरी थैं घाम पर रौख दीनी बल, गुन गुना पांणीन नयेणूं रै बल, ठंड नि लग, अर् अपड़ा बिछौंण भी घाम पर डाल दीनी, ज्यादा ताता बिस्तर मा ना स्ये बल् सुधि तवैत खराब दौं व्हलि, सुबेर ब्यखुनि जरा हवा खांण भोर औंणू रै बल तख भितरे ना रे बल, जिकुड़ा गरमि नि बैठ।

मैं– दादी तुम चिंता नि करा, सब व्यवस्था छैंच यख,

दादी – व्यवस्था त् ह्वलि पर कमि न करि तू खांण पेंण मा, तबरि त्वैन धारा पांणी पर भी नि जांण बल्, यखि मु द्वी बल्टि पांणी मंगै अर् तैं गदरा खाक पर नयैंणी बल🧖‍♂🧖‍♂ ज्यादा आफ बुरसट मा ना घूमि सुबेर ब्यखुनि, गरम जौकेट लगै धौरी बल

मैं – ठीक चा दादी, जन्न तुम ब्वना तनि कलु,

दादी – पर नाती एैंसु यु बकिबातो काल एै भै यमणां कभि नि व्हे छो बल, ना मिलि बांटि खांण, न दगड़ी बैठणं, दिन भर सचि धन्न बल गिच्चु बूझी क्, या बिमारी भि कुछ अजीबै एै बल, ब्याली टीवी मा छां दिखौंणा कि ज्वा दिल्ली तफुन बटि एैन तू थैं 21 दिन यखुलि रौंण बल,
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मैं– हौं दादी कुछ दिन त् रौंण पड़लू घौर वलू से दूर,

दादी – तु तबरि यंखि फुंड रौं, यखि बणौं यखि खा, ना त्येरू ब्यो बंद, ना नौना बाला, त्वैथे कैंकि चिंता बल,

मैं – दादी तुम प्वांइट त् ठीक छन्न मना पर, तख भि द्वी मैना बटि भितरे छा हम।

दादी कैं संवाद से एैंसा लग रहा था जैंसे दादी किसी स्वीली को समझा रही हो बल, पर दादी का मैलुख सरील, ये तो कुछ भी नहीं अगले दिन दूसरी दादी ने दूर से धै लगाई अर् कहा एै नाति ठीक च् बल सरील? मैनै भी कहा ठीक है बल, तै प्वोंगड़ा छ्वोड़ पर औ द्वी पुड़िया बिस्कूटा छन्न म्यारा त्वैथें लयां च्या मा डुबै खै दिनी सुबेर व्यखुनि, घौर तेरा भुला भुलि काफलू व्हाला जंया द्वी कटोरि अफू थैं भी मगैं, म्यारा घौरा चौंल छन्न बल कुट्या, अर् तु यख खांणों अफू बणौंन त् मि कैमु भ्येजदू बल सि बजारा चौंल सवादया नि हौंदा बल्, जबार तक यख रौंण घौरों खांणू मंगै ता खै, कमजोरि नि औ बल्। 🤗🤗🤗

(Quarantine Series) म्येरी दादी आजकल सुबेर-सुबेर दूध लेके आ रही है बल च्या पी थैं गरमि नि हौंदी बल्,🥰🥰 

उधर म्येरि ब्वे भी इन सबसे उपर आजकल खूब बकली-बकली क्वोदे की रोटि घ्यू लगा के पंचैत भवन ला रही है, दाली मैं भी चमच भौरकर घ्यू डाल रही है, कभी लैंगुड़ा की भुजि, कभि चौंसू कभि बठवांड़ी झौली, अक्सर एैंसा खाना स्वीली को ही दिया जाता है बल,😆😆 (Quarantine Series)

भुलि भी काफल रोज ला रही है, छोटा भुला डेली धारे पानी ला कर घाम में तच्याने रख रहा है बल, जैंसे स्वीली के लिए उसके स्वीलणां पहुचने से पहले पानी रख देते हैं बल, 😂😂 भले छोटे भाई ने रोज के 10रुपये की डील रखी है पानी लाने की बल, 😀😀,

बल मेरी नजर में दादी ने क्वारनटीन को स्वीलीटीन समझ रखा था, अर दादी अपने जगा पर ठीक है, दादी के विचार उचित हीं हैं, जैंसे स्वीली को नियमों का पालन करना पड़ता हैं वैंसे क्वारनटीन वाले मनखि को, नहाना अलग, खाना और पौष्किक, कै पर टच नहीं होना बल छूं हो सकती है मतलब उसे भी क्वारनटीन होना पड़ सकता है बल्,

लेख:- हरदेव नेगी

Quarantine Series 

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