Pradhan Election – प्रधान कु रीतू थान सांकरी गुबकाशी परेशान

Pradhan Election – प्रधान कु रीतू थान सांकरी गुबकाशी परेशान

ब्याली रात स्वींणा में गौं के पंचैत चौक में गौं के सभी पंच परवांण, ज्वान बुड्या, दाना स्याणां युवक मंगल दल, महिला मंगल इकट्ठा हो रखे थे, द्वी चार मनख्यों पर देवता ओतरा ओतरी कर रहा था, लोग टक्क लगा हाथ जोड़े खड़े थे, पर देवता साइलैंट मोड में अवतरित हो रहे थे, बार बार अपनी छाती पर हाथ से बड़ी बड़ी मार रहे थे, अर बामण मंत्रो से देवताओं के मन की बात जानने की कोशिश कर रहा था पर देवता भी अपनी अक्कड़ में थे, कुछ स्यांणा बैखों ने हाथ जोड़कर पूछा, माराज क्या ह्वे? चुप किलै है, सैरू गौं परेशान है, पर तुम कुछ गिच्चा नहीं खोलेगे तो हम क्या जाने विपदा क्या है?..

………….!………………….एक दादी रोते हुए माराज म्येरू नौनू रात भर थतरा रहा था, किलै परेशान कर रखा है मेरे लड़के को, ना मैन कैकू वोडू सारी ना, ना गाँव में किसी का बुरा किया, अगर कुछ देंण तो बता माराज तेरू हिसा किसा जु भी चा, पर मेरा नौना थैं परसान करना छोड़ दें, एक दादी और आ कहने लगी मेरे लड़के की ब्वारी भी परेशान चा ब्याली बल बौंण घास काटते वक्त ढुकरताल मार रही थी बल बौंण और तो और भैंसी पिज्याने के टाइम पर सारा दूध खुद घटक गई बल, रीतू भंडू घर लेकर आइ गुठ्यार से, बल माराज म्येरी ब्वारी को मत सता बल घर कु काम काज कनक्वै होंण बल, एैंसे में ब्वारी को बौंण भेजने की ढौर लग रही है माराज, तो गाँव के लड़के ने कहा माराज ब्याली ओन लाइन क्लास लेते वक्त गुरुजी पर देवता आ गया बल, और बोल रहे थे म्येरी ड्यूटी नि चैंदी लगी बल, मै नहीं बनूंगा परिशीमन अधिकारी बल, हमको कुछ समझ नहीं आ रहा था, आखिर साइंस वाले गुरुजी पर ये क्या हो गया बल, अर फोन हैंग हो गया था बल गुरुजी ढुकरताल से सभी छात्रों का. माराज कुछ करो बल एैंसे में हमारी पढ़ाइ डिस्टब हो रही बल. ………………!

तभी गाँव के एक बोडा ने जोर से औजाड़ मार दी और सभी लोग डर गये, बोडा का देवता गौं के धारे की तरफ गया और नहा कर आया, और ज्यूनाल हाथों में गाण के उपर फैंकने लगा और अपनी हथेली में देखकर कहने लगा, एक साल बटि गौं कु भलू नि ह्वोंणू , गौं कु विकास ख्वैली बल, सैरा मुल्क चौगसी हो रखी बल पर सांकरी पर अंधेर पट्, गौं थैं गर्त में क्यूं धकेला बल, कैन ख्वे गौं बल, विकास कख हरचि बल, किलै छन पंच सियां, जागृत कब व्होला, गौं का खातिर, तभी तो तुमरा लाड़िक ब्वारी परसान छन्न, गौं के लोग माराज विकास तो हो रखे हैं गाँव में वो भी एक नहीं दो दो बल, एक फौज में है तो एक केदार भगवान में हैलीपैड में लगा है बल, कन्न बात कना माराज तुम, देवता उस पर जोर से ताड़े मारता है मनख्यों पर, और कहता है गिच्चा समाली कै बात करो बल, मैं गाँव के उन्नति सुख समृद्धि बाटा घाटा के विकास की बात कर रहा हूँ बल, क्षेत्र समिति कु थान बणैंली तुमुन अर थापली भी पर तैकू अग्वानी बीर प्रधान किलै (Pradhan Election)  छ्वोड़ी बल? सु कैन थापड़? सु किलै चा जखो तख भटकुणूं, प्रधान थै स्थान क्यों नहीं दिया बल? प्रधान कु हंकार चा बल, विकास की रिद्दि सिद्धि कख बकि हौंण बल, तबै त् इ देवता साइलैंट छन्न हुय्यां बल, गिच्चा तुमरा छन्न बुझ्या और देवता ने क्या कहना,
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गाँव के पंच माराज हमरि क्वै गलती नी, सब अधिकारी लोगूं गलती चा माराज, गुबकाशी भी परधान नहीं अर् सांकरी भी, क्वी भैरो छो बल बस्यूं यख किरया पर वैका नौ छो बल अयूं पतड़ा मा, हमुन जांच पूछ उच्याड़ू भि निकाली पर, अगवानी जौन समाधान कन छो तौंकू गिच्चू बुझ्यूं माराज, देवता सु अधिकारी, मनखि नि छो, अन्न नि खान छो, जु सु अपड़ू विकास खूब दिखौंणू फाइलूं मा गौं कु विकास सपचट कलि वैन, माराज हमुन क्या कन्न, हम तो भ्योरा बाखरा हैं बल पालसी तो देरादूंण सुनिंन्द सोया है बल अर उसके चांटा बाठा भी, गौं वालों ने अब क्या करना, बोडा का देवता उन द्वी चारों पर आ रहे देवताओं को शांत करने की कोशिश कर रहा था बल, जिनपर प्रधान अवतरित हो रहा था, फिर पंचो ने आश्वासन रूपी छिफली गिच्ची की, और सबका देवता शांत हो गया, फिर बोडा के देवता ने बचन मांगा पंचो से छः महीना का भितर प्रधान कु थान बण्यूं चैन, निथर विकासे गंगा नि बगण्यां ये गौं मा, बामण ने तीनों प्रधानों के नरों के माथे पर पिठाइं लगाइ ओर धूप अगरबत्ति सुंगा कर शांत किया, तब तक बाहर बादल दिदा गरज रहे थे म्येरी नींद फट टूटी.

 

लेख :- हरदेव नेगी

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