पंचायत चुनाव – बल भैजी म्येरि ब्वारी भी दावेदार

Panchayat Election by Pahadi Blogger,

जैंसे ही देहरादूंण से राजनीति के पंडितों  ने  पंचायत चुनाव का  उच्यांणा निकाला वैंसे ही गाँव में प्रतिनिधित्व रूपी मनखी अवतरित होने लगे. अब गौं ख्वोलों में गाजी पाती घास पन्यार सैणा पुंगड़ो की बात भूलकर सबके वबरों में  पंचायत चुनाव की छ्वीं लगने लगी,  जाती पात सभी प्रकार लोभ प्रलोभ देहारदूंण के पंडितों  ने  सेट कर दिये  थे  अब जिस गाँव में सामान्य व  आरछणं, पुरूष व महिला के सीटों पर मंथन अपने अपने ढंग से होने लग गया. गौं  के  पंच नाम देवता, कुल देवता  सभी  प्रकार के  पहाड़ी देवताओं  का साक्षात रूप  और  भविष्य बताने  का सबसे कठिन दौर आ गया, जिसके  ढर से  देवता पिछले  पांच सालों से सांदी  लूके  थे. आखिर  उनका भी  न्यौ  निसाब  करने  की घड़ि  आ  गई , और  देवताओं  के  नर  आजकल  जांणी बूझी के  यनै  तनै  नहीं  जा रहे  हैं क्या पता  कब कौन  बुला  ले अपने  डेरे  मैं कि  बल  बतौं  माराज  मैन  एैंसु  चुनौं  मा  जीत जांण, अगर  जीत  जौलू  त्यारा नौ कि  बाखुरु  चणौलू  अगर  नि  जितण्यां  त्येरी धूप अगरबत्ति बंद.  अब सबको  अपनी -अपनी  डौर  है कोई भी वोट  सार्वजनिक करने  से  डर  रहा है. आखिर  गौं  की  बात  है.

अब  छ्वीं  लगाता हूँ मैं अपने  गौं की  सामान्य  जाति  के  मवासो  से  भरा  हुआ  मेरा  गाँव  भी  पंचायत चुनौ  की  ताल  में  जग  उठा  और  इस  बार  बहुत  खास  चुनौ  है बल,  छेत्र  समिती में   पुरुष  व  प्रधान  के  लिए  महिला  सीट  आरक्षित है.  अब समस्या ये  बल  प्रधान की सीट् पर  किसकी  ब्वारी  करेगी  दावेदारी, सोशल मीडिया पर  भी  खूब  सवाल जवाब  चल  रहे  हैं, वट्स ग्रुप भी  विचारों  से  उमड़ा  पड़ा  है, बल  किसकी  है  एैंसी  सग्वोर दार ब्वारी जो  गाँव का प्रतिनिधित्व कर सके.  पढ़ी लिखि भी चाहिए बल और  गौं  में जिसका उठना बैठना भी ठीक हो,  उधर फेसबुक पर  नौटियाल भैजी  बिगुल  फूक ही  दिया  बल  भैजी  म्येरी ब्वारी कर रही है बल दावेदारी.  ये  बात  बथौं  की  तरह  रात  को  चुलड़े  रोटि  खाते  बगत  सभी  घरों  होने लगी, पर    हैकु  कौन  उठ रहा  होगा बल, ना  हो  कि  फेसबुक में  नौटियाल  भैजी  की  पोस्ट  पर  नेगी  भैजी  ने  भी  कमेंट्री कर  दिया  कि  अगर  आप  लोग  साथ  दें  तो म्येरि  ब्वारी  भी  दावेदारी  करनी  चाहती  है. गौं  के  भिलर  छ्वोरों  ने  उस  पोस्ट  को  भी  लाइमलाइट में  डाल  दिया  और  गौं  की  द्वी  नयी नयी  ब्वारीयों की दावेदारी  हो  गई  बल.  उधर  रांणा  भैजी  ने  भी अपना वट्स अप  स्टेटस  अपडेट कर  दिया, इस बार बदलाव  मथ्या ख्वौला  से होगा बल , भैजी  ने   गाँव  में  छेत्रवाद  वाला बीज  बो  दिया. अब जब ये बात सब घरों  में खुसुर पुसुर  होने लगी  तो  धार प्वोर रावत भैजी ने  अपनी फेसबुक  वट्स डीपी  ही बदल  दी, और  फोटू  पर  कमेंट लिखा. ना  नेगी  से  ना नौटियाल से,  रांणा जी हमे  माफ करना बल  प्रधानी बनेगी  इस बार  धार  प्वोर  से.

उधर  कोटवाल, लालमोरिया, कुकरेती,  मंमगांई व जोशी  जी  और  बिष्ट जी इन सभी के  यहाँ के  भैजियों  ने  गुप्त मींटिंग की  कि  इस  हम  गठबंधन वाला प्रधान बनायेंगे. पूरे गाँव में आज कल फिल्म की तरह संशय बना हुआ है, अगर एक ख्वोला के चार पांच लोग कहीं पर एक साथ बात कर रहे हों और तब किसी दूसरे ख्वोले के मनखी की नजर अगर उन पर पढ़ जाए तो उसके दिमाग में एक संशय पैदा हो जाता है, वहीं अगर चार पाँच घस्यारी एक साथ घास पन्यार जाने लगे तो दूसरी घस्यारियों को भी संशय हो जाता है. अब  गाँव  में  जिन  जातीयों  के  मावसे  ज्यादा थे  वो बंटने की कगार पर आ  चुके थे.  अब  शाम  के  बगत  गुप्तकाशी  में  बिष्ट जी  की  चाय की  दुकान में बुजुर्ग दादा लोग  बैठ कर  चुनाव  की  बात  करने  लगे, बल  फलाणें  नाती की ब्वारी इस  बार  चुनाव  में  उठ रही  बल, पर  बुजुर्ग  लोगों ने  चुनाव  बहिष्कार करने निणय लिया वहाँ पर  और  बात  रखी  कि  बल  एक  आजकल  नया  जमना  की  ब्वारी  ना तो  हम  बुज़ुर्ग मनख्यों के देखकर  सेवा सौंली  लगाती  है, ना  मुंड ढकाती  हैं,  बल  ना ही बाटों  में  चलते  टाईम  रास्ता छोड़ती हैं  बल  सीधे  काख से  गुजर  जाती  हैं बल, इस  प्रकार  जिताऊ  वोट  नयीं  ब्वारियों के हिस्से से  कट  गई, पर  पक्की  दावेदार नेगी  अर   रांणा  जी की  ब्वारियों की  है  बल,  पर  बड़ी  बात  ये  है  कि  जिला चुनाव  आयोग  अधिकारी ने  अभी  लिस्ट नहीं लगाई थी  कि  महिला  से ज्यादा पुरुष (प्रधान पति) सक्रिय हो गये.

पर  जैंसे  ही  पिछले  हफ्ते  चुनाव अधिकारी  ने  लिस्ट लगाई, जो गाँव मेरा  पूरा  सामान्य जाति का है  वहाँ  प्रधान की सीट  एस सी  जाति के  नाम  कर  दी,  अब  प्रधान  पति  छिड़ा छिड़ि में पढ़ गये, यार ये अधिकारी झांज में था क्या जो  इसने बिना सोचे  समझे ये लिस्ट बनायी, या किसी  की  मिलीभगत है बल, खामखा इस चक्कर में बौजी ज्यादा मुंडारा भैजी को हो गया और शाम को अपनी तरफ के दायित्वधारियों से मिलकर एक घुटकी हिल टाप की लगाने लगे. अभी तो परचा नहीं भरा और भैजी की आधा पेटी खत्म हो गई बल. उधर एक बौजी की सास तो  गालियों से सपचट करने लग गई, बल  हमारि दफै कन क्वै ह्वे बल,  ई सात पांजा मिलि ह्वोला बल, तू थैं  पता  छौ  कि  यूंकि लड़कै ब्वारी जीत पक्की चा, पर  तौन  भी  यै नसि ना त् तै नसि अपणी चाल चलि, बल  सच्ची नि होलु हमरु क्वै ना, और गाँव की कुछ ब्वारी व नाती लोग जान बूझकर दादी को छिज्या रहे थे.  अब गौं के कुछ राजनीति अनुभवी लोग तहसील मुख्यालय गये और जो कुछ त्रुटि थी उसे चुनाव अधिकारी को एक पत्र के माध्यम से सौंप दिया…और अगली लिस्ट आने तक फिर चुनाव का टक्क बौजी से ज्यादा प्रधान पति की लग रखी है, बौजी तो बस मोहरा है चुनाव प्रचार जीतने के बाद का काम काज सब प्रधान पति को सभांलना है बल.  आखिर महिला सशक्तिकरण की बात जो है. पर  फिर  चाची,बौडी बौजी ने कुछ नहीं कहा पर प्रधान पति ने जरूर कह दिया :- बल भैजी म्येरि ब्वारी भी दावेदार.

लेख:- हरदेव नंगी 

6 thoughts on “पंचायत चुनाव – बल भैजी म्येरि ब्वारी भी दावेदार”

  1. हरेन्द्र खोयाल

    भौत बढ़िया हरदेव जी । आजकल चुनाव का सटीक विवरण दिया है 👌👌👌👌👌

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