नाटक – चकड़ेत बिरजु ब्वे अर मास्टर बुबा

Natak Chakdet Birju Bwe Ur Master Buba

नाटक – चकड़ेत बिरजु  ब्वे अर मास्टर बुबा:- (Natak Chakdet Birju Bwe Ur Master Buba)

सुबेर घाम कु गौं बीच सरकी छो, ब्वे गुठ्यार बटि भैंसी पिजैतैं राळी रोटि अर भुजि बणांण लगी छै, बिरजु का पिता जी, अपणा चमड़ा बूटू पर पोलिस छा कना, बिरजु का पिता जी दूर बांगर मुल्क इंटर कॉलेज मा संस्कृत का मास्टर छा, सनेसर का दिन सि घौर एै छा, सोमवारो सुबेर नौ बजि वाळी गाड़ी मा तौन स्कूल पौंछणं,
अर् बिरजु भी गौं मा आजकल किरकेट मैच छा व्हौंणा त् सु भि देरादूंण बटि मैच ख्यनौ घौर छों एैंयूं, बाबा तैयार व्हेगि छा तैका, बिरजु स्यायूं छो, 

बिरजु कि ब्वे :- हे बिरजु खड़ु उठ रे, भैर घाम द्वोफरा व्हेगि, तु क्या अभि तक लमपसार व्हे थैं स्यायूं, खड़ु उठ जा अपणा पिताजी कु झ्वौळा सड़कि मु थैं लिकरी जा,
बिरजु का पिताजी:- अरे किलै उठौणीं व्हे सचिन तेंदुलकर का बच्चा थैं, कुछ यु देरादूंण फरकौंणू पढ़ै का नौ पर कुछ अब यु किरकेट मैच ख्येलि फरकौलू, मि अफू ल्यांदू अपणु बैग, मि पर भी हिकमत छैंची,
बिरजु :- बिरजु चड़म उठी थैं गात उंदण्यें थैं बिना कुछ ब्वोल्या पिताजी कु बैग पकड़ी थैं रोड़ मा लिजै, पिताजी भी पिछनै बटि सड़क मा पौंछी छा,
पिताजी :- अरे ओ बिरजू तु आधी रात मा ना घौर, त्येरु मैच जक्ख रौलू, तक्ख रौलू, चार बजि थैं घौर एै जे, मि त्येरि ब्वे थैं पूछलु, नितर म्यारा म्वोतड़ा ना खै..

बिरजु कि ब्वे :- बिरजु झट्ट करि द्वी कंटर पांणी का गुठ्यार मा भर द्ये, तौं गाज्यून सु चड़चड़कार पांणि कनक्वै प्यौंण, घाम पर रौखलु त् जरा सी ताचला कंटर,

बिरजु :- अरे ब्वे मि अफू रौखदू, पर तुम सुबेर – सुबेर यु ककड़ाट ना करा, स्यौंण भि नि दैंदा, सरि निन्द खराब कैली,
ब्वे :– हरयां देबो, स्योंण कखि बटि त्वैन, दिन भर लापता व्हयुं, सुबेर खांणू, त्येरु कखि क्वै अता पता नी, ब्यखुनि औंणू अर फोन पर चा चिपकणूं, फोन पर यन चा चिपक्यू जन त्येरु तति बड़ु बिजनेस अर त्येरा टरक फसिंग्ये व्होला साकीनधार, कुछ सरम त्वैथे नी, कुछ तौसंण नी जु रात बिर्त त्वे दगड़ी फोन पर छन्न कच्छणी लांणा, यु फोन भि काल व्हेगि, कै मासद बणैं यु फोन।
बिरजु :– ब्वे तु अपड़ू गिच्चु बंद रौख, फोन बात कनौ नि ळ्यायुं त क्यां थैं ळ्यायूं,
ब्वे :- पढ़ै लिखै त् चौपट चा व्हयीं, बस दिन बर बैट बौल, पढ़लु नी त् अपड़ा दिनु थैं रवोलु, हमरु क्या चा, हमुन त अपड़ा दिन कटलिन्, कुछ तयारी कर ल्ये यां से बड़िया, लोग क्या ब्वोलला, हमथैं, पिताजी गुरुजी अर् नौनू लंख लांणू, कमौंण पड़दू तब पता चललु आटा चौंलू भौ,
बिरजु:– अरे ब्वे पढ़ै त् कनू छौं, गिरेजुएसन व्हे नी तुमथैं नौकरी पल्लै चैंणी, मि भी जंणदू छौं मिनगत कन्न पड़दी, तैयारी कन्न पड़दी, अभि म्येरु पैलु ही साल चा, अब जरा किरकेट ख्यन्न लैग्यूं त् मि बरबाद छौं बिगड़ग्यूं मि, जिंदगी मा खेल भी जरूरी छा, जु लड़का दिन भर किताब पर रौंदा चिपक्या सि कामा नि हौंदन, जु ज्यादा टौपर – टौपर बंणदन किताबूं मा खूब व्हाला पर असल जिंदगी मा पिच्छने रौंदन, त्यारा ब्वन पर मिन सांइस धौरी स्कूल मा, अच्छि नंबर से भी पास व्हयुं, घौर कु काम भि करि अर् पढ़ै भि करदू, जैन ब्वोलि ठिक ब्वोलि “पितजी सभि नौकरी वाला व्हे जौं पर मास्टर नि चैंद व्होयां” युं थैं अपड़ा नौन्याल दिन भर किताबा का प्यौट चैंदा चिपक्या.

ब्वे :- आजकला नौनु थैं समझौंण बुझौंण बेकारे च, ज्यै करदन जनि करदन, ये से जादा क्य ब्वन तब,
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बिरजु उछ्यादी भि खूब करदू छो, ल्वोगू का आड़ू, माल्टा नारंगी, काखड़ी मुगरी भी खूब च्वोरदू छो, लड़ै मा भि कम नि छो, जख जांण तख ओराड़ कनो काम छो, काखड़ी च्वन अलग छ्वीं छन्न पर जौड़ा बटि लगलू फुंड उपाड़दू छो, पर पढ़ै लिखै धांण काज मा भि खूब बांठू छो, ह्यूंदा बगत आजकल गौं मा किरकेट मैच भि जखो तख व्होंणा छन्न, बिरजू संगती बटा छो लग्यूं, जै दिन मैच नि छा व्होंणा वै दिन पर गौं का सभि नौना ब्येटि ब्वारी कठ्ठा व्हेकि पेल्दा म्वोल क्वोदड़ा सारयूं मा डाळणां छा, म्वोळारत्यूं भीड़ मा पता नि चल्दू छो कब गुठ्यार मा मरास खालि व्हे जांदी, बिरजू भी खूब हाथ छो बटौंणू धांण मा अपड़ी ब्वे दगड़ी,
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मैच ख्येलि तैं अर म्वळार्त निबटैं तैं बिरजू देरादूंण चलिग्ये छो, आजकल बिरजु का पिताजी भी ठंडु छुट्टि मा घौर छा एैंया, अर द्वी झंणा आजकल पुंगड़ू का कांडा छा कंटणा, दिनभर थौकी तैं बिरजु का पिताजी ब्यखुनि द्वी – द्वी पैग कच्छमोळी भि घुटकि जांदा, ब्यखुनि रोटि पांथण दबे बिरजु कु फोन अपणी ब्वे थैं एै,
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बिरजु – माँ प्रणाम,
ब्वे :- चिरंजीवी रौ रे लाटा, कन चा त्येरु सरील पांणि, खेलि रोटि,
बिरजु :– हां ब्वे मि ठीक छों, रोटि अब बणौंलु,
ब्वे :- रात नि व्हे अभि जु त्वेन रोटि नि बणैंण, बगत रोटि खैंई रौली त ठीक व्होंद, गे टैमों खांणु क्वे खांणु व्हे, तु मैगी ना थड़कै,
बिरजु:- मि अफू बणौंदु, ब्वे मि डाक्टरी तैयारी छों कन्न चांणु, अर “नीट” (NEET) कि तैयारी कनौं तैं मैने 7000 फीस चा, कोचिंग इंस्टीयूट भी अच्छु चा,
ब्वे :- ठीक चा लाटा, तु तैयारी कर पैंसु कमि ना समझि, पढ़ लिख जालु त् भ्वोळ त्येरु भविष्य सुधरोलु, ये से जादा क्य चैंदु हमुथैं, तु बस मिनगत कर, मि अफू बात करदु त्येरा पिताजी दगड़ी,
बिरजु :– ठीक चा मांजी, तु पिताजी दगड़ी बात कर दीनी.

बिरजु कि ब्वे अर पिताजी कु संवाद.

बिरजु कि ब्वे अर पिताजी कु संवाद. (Natak Chakdet Birju Bwe Ur Master Buba)

ब्वे :– सूंणा दूं बिरजु छो ब्वनु कि बल मै नीट कि तयारी करदूं बल, फीस सात हजार मैना चा,
पिताजी:– क्यांकि तयारी बल?
ब्वे :– नीट कि,
पिताजी :- दा ब्वोला, अपड़ा बाबा तैं बेवकूफ़ चा बणौंणू, सात हजार रुप्या सु भि नीटों तैं, बिगड़ी यु देरादूंण जे तैं,
ब्वे:- ये मा बिगड़ण वाळि क्य बात च, सहि ता चा म्येरु नौनु कनू नीटे तयारि,
पिताजी :- क्या ठीक चा सहि कनु, सात हजार रुप्या चैंणा नीटो तैं, सहि करि त्वेन जु मैमु बतैली, हैं, सात हजार रुप्या चैंणा नीट प्योंणों तैं, अरे प्योंणे च त् पाँच सौ रुप्यो मैकडौल नीट प्ये दु, मि भ्यौजदू यख बटि, बाबा तैं बेवकूफ़ चा बणौंणू
ब्वे :– अरे झांजि बुड्या तुमरा दिमाग म त् दिन भर दारू कि बात चा चलणीं, भलि बात किळै सोचणं तुमुन, म्यारा नौनन् किळै प्यौंण दारु? नीट कि तैयारी चा सु कनु डाक्टर बड़णों तैं, तुमुन त् नीट मतलब दारु हि जांणी सदनि,
पिताजी :- यार तु गिच्चा समाळि बात कर, झांजी छौं मि, पैलि नि बतै सकदी छे डाक्टरी तयारि कनौ चा ब्वनु, अब तु कै दगड़ि सीदु नीट की बात करलि व्हेन क्या समझंण?
ब्वे :– सब तुम जनि दरोल्या मास्टर थौड़े छन्न, जु तैं नीट कु मतलबै नी पता,
पिताजी :- चल तुही बतै दै, ज्यादा ज्ञानि ध्यानि बड़णीं,
ब्वे :- तुम मिथैं क्या छन्न समझंणा, तै जमनो बीएससी पास छौं मि, सु गळति म्यारा बुबा कि व्हे जु तौन मास्टर ब्वोलि तुम जन संस्कृत का मास्टर दगड़ी बिवायुं, अगर तबार ना ब्वोळदु ब्यों थैं त् आज मिन भी कखि सांइसो मास्टर रौंण छो, अर ब्यो करदु भित कै साइंस वाळा मास्टर अर प्रोफेसर दगड़ा, पर म्येरु सु ज्वोग,
पिताजी :- यार फाळतु बात नि ब्वोल, संस्कृत भाषा तैं समझणि क्य चा , चै त्येरु ब्यो कै भि बड़ा बिद्वान दगड़ा हौंदु त् बिना संस्कृत बांच्या त्येरु ब्यो वे सांइस वाळा दगड़ा भि नि व्होंण छो, ब्येदी मा जब पंडित जीन् संस्कृत मा स्लोक बाच्या तबै त् त्येरु म्येरु सात जळमों कु बंधन चा, चल पैळी नीट कु मतलब बतै दे?

ब्वे :- नीट कु मतलब चा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET National Eligibility cum Entrance Test )
अपड़ी डैरी मा भि ळ्येख दिन्या, अर एक बात टक्क लगै क सूण्यां म्यारा बिरजू थैं पैंसू कमि नि व्हौंण चैंद पढ़ै मा, मैथे पूरू विश्वास चा कि म्येरु बिरजू नीट पेपर पास कर द्यौलु अर हेका सार सरकारी कॉलेज बटि डॉक्टरी करलु।
पिताजी :– हां – हां पैंसु कभि कमि करि मैन व्हेथैं,

बिरजु अब देरादून मा तैयारि कन बैठी छो, सुबेर से लेकर ब्यखुनि तक कोचिंग रैंदु छो, खूब मिनगत कन लग्यूं छो, ब्वेन भि खूब समझै बुझै कि हमरी इज्ज़त रखि बल अपड़ा ब्वे बाबु नौ ऊंचो करि बल त्वे दगड़्या लोगूं का नौना नौनि क्वे इंजीनियरिंग छन्न कना क्वे फौजी व्हेगिन, तु लंख ना लगै तफुन, मौज कनौ ता यतनि ज़िंदगी चा पड़ी, होर क्य ब्वन तब,

बिरजु भिड़ासोण पर मिनगत छो कनू पिछला छे-सात मैनु बिटि घौर भि नि एै, अलग- अलग कॉलेजा पेपर देंण छो लग्यूं, कभि दिली जांणू पेपर द्योंण त् कभि भोपाल जयपुर कभि देरादूने मा, बिरजु भि टस मा मस नि छ्वोड़ी, ब्वे कि बात एैंठ छे वैकि रखि, एैंसु कु नीट फौम भि छो भौरयूं, पिछला पांच छे सालू का प्रश्न पत्र भी छो हल कन पर लग्यूं कोशिश छे कि ये साल नीट कु पेपर निकळनै चा, धूप धुपांणु भि खूब करदु छो और वे से दुगड़ां पढ़ै भि करदु छो, धूप अगरबति भी तब करि व्हेन जब वैकि ब्वेन ब्वोलि वैंथे, निथर सु द्यबतू नौं सुंणि थथरै जांदू छो, बैसाखा मैना नीटो पेपर छो देरादून, जनि पेपरा दिन नजदीक एैन जिकुड़ी भि धक धक छैं व्होंणी, पिताजी भी दुवै छा कन लग्यां कि बिरजु निकळी जांदू छो त कुज्यांणी क्य व्हौंदु छो बल,

बेसाखा मैना पेपर द्योंणा बाद व्हैन कोचिंग सेंटर मा प्रश्न पत्र का उत्तर मिलैन त उत्तर लगभग सहि छा जांणा, वखा गुरुजि नि भि ब्वोलि कि मैरिट लिस्ट मा नो एै सकदु बल त्येरु, अब अगनै किसमतै बात चा कि मैरिट कति जांदी बल, सरकरारी मा मैरिट चैंदी ढंगे, वेका बाद बिरजु एक साल बाद घौर एै अपड़ा अर ब्वे दगड़ी क्वदड़ा सार बूतंण छो जांणू त कभि कभि काफलू थैं बौंण,
अब बिरजू जेठा मैना कि दस तारीको इंतजार छो कनू, वे दिन बल रिज़ल्ट औंण छो नीट कु, अब वैका पिताजी भि वैका आजकल दस बारह की कापी चैक कनै ड्यूटी छे लगि, दस तरिक रिजल्ट एै, बिरजू बजार कंप्यूटर सेंटर मा ग्ये थक जनि रिज़ल्ट द्येखि त् बिरजू का आंखू बटि आँसू कि पंणधर बगंण लैग्ये, खुटा थथरांण लैगिन, बिरजु का नंबर 720 मा बटि बिरजू का 580 नंबर छा अयां, बिरजू कि मुखड़ी बुरांस जन छे फुलि, बिरजू कि मिनगत कु फल बिरजू थैं मिलग्ये छो, बिरजू घौर एै अर अपड़ू रिजल्ट अपड़ी ब्वे थैं बताइ, ब्वे भि रौंण लगि, जनि बिरजू का बाबा थैं पता चलि त् स्कूला स्टाफ मा बथाइ त गुरुजी लोगुन बधै दिनी, बल आज शाम को त बल प्रोग्राम व्हौंण चैंद गुरुजी का तरफां बटि, अर शाम को बिरजू का पिताजी मूण बणैं तैं घौर एैन, जनि घौर एैन त्

ब्वे :- हो आज त तुमथै होर दि बानु मिलि घुटकौंणौं थैं, आज नौनू ज्वा डॉक्टरी मा निकळी ग्ये, कन सौणि तुमरि स्या प्वोटगी, एक दिन भि चैंन नी तुमथैं, आज प्यौंण जरूरी छो क्य, तुमरा आंदड़ा प्यंदड़ा भि नि सौड़णां इं दारू पीथे,
पिताजी :- अरे आज तक नि सौणिन् त अब कनक्वे सौड़ण, अगर सौण भि जाला त म्येरु बेटा डॉक्टर व्हे तैं अफू करदू म्येरु इलाज, आखिर तेकि डॉक्टरी कै दिन काम औंण, अगर तैन अपड़ू बाडो इलाज नि कर सकणं त क्य फैदा यनु डॉक्टरी कनौ।
ब्वे :- हे अकुळि बुड्या, डाक्टर जब बणंलू तब बणंलू म्येरु नौनू पर अपड़ा अंदड़ा प्यंदड़ा पैले सणै द्या, लोग भलि बात स्वोचदा तुम कुछ होर ही छन्न स्वचणां,
पिताजी :- अरे अफू तु चा ब्वनी कि तुमरा अंदड़ा प्यंदड़ा भि नि सौणिन इ दारू पीथैं, मि क्य अंदड़ा प्यदंड़ा सड़ौणों तैं छौं प्येणूं आज, अपड़ा बेटा कि खुशि मा छौं प्यौंणूं आज, भलि बांण त्येरा गिच्चा मा कबि नि एै,
ब्वे :- म्ये ल्यौ तुम कंटर चड़ै द्या, सुद इंसान तैं व्हौंण चैंदी कि, आज इतगा खुशि कु दिन चा, बड़ा मुश्किल पर हमरु नौनू डॉक्टरी मा निकळी, कै कॉलेज मा ऐडमिशन मिलालु, क्य वखै फीस व्हली, गुरजी होंणा नाता कुछ त समझदारी कु काम करा, तुम त अभी बटि प्येणं लग्यां त ब्वन नि मैन,
पिताजी :- अरे तु चिंता किलै कनी चा, एक नौनू चा म्येरु, व्हे तैं की चीजे कमि नि होंण देंण्यां मि, म्येरु बिरजू डॉक्टर बंणलु चै कथगै फीस नि व्हे जौ कॉलेजों की, मि बस वे का चकड़ैत पना खातिर गुस्सा व्हौंदु छो, पढ़ै का बाना ना, मैं भि खुसि चा कि वो अब सही दिसा मा एैथर बढ़ी,
ब्वे :- क्य व्हे त चकड़ेत छौ म्येरु बिरजू, दिन भर किताबा भितर घुसि तैं भि कुछ नि हौंद, पढ़ै का दगड़ा-दगड़ी घौर बौंणो काम काज भि कन चैंदू, अब ज्वान नौनू च त ओराण भि कनै चि तैन, अबार नि कन उछ्यादी त कबार कन,

पिताजी :- चला ज्व कुछ व्हेगी ठिक व्हेगी, अब खांणौं रौख दे मिथैं,

नौन्याळू थैं अपड़ा जीवन मा सिरफ किताबी दुन्या मा भि नि व्हौंण चैंद, उंथैं पढ़ै का साथ-साथ अपड़ा घौर बौंणा काम काज मा भि एैथर हौंण चैंद, जु नौन्याळ ब्वे बाबू पैंसा देखदन सि कभि जिंदगी मा सफल नि हौंदा, जु नौन्याळ अपड़ा ब्वे बाबू गरीबी का दिन देखदा सि हमेसा सफल हौंदा, बिरजु चकड़ैत जरुर छो पर पढ़ै हो या खेल कूद या फिर घौर बौंणों काज हमेसा अग्वाड़ी रौंद छो, तबै सु अपड़ा जिंदगी सफल व्हे

लेखक :- हरदेव नेगी

 

 

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