ऋतु बोड़ीगे

Ritu Bodigy Garhwali Kavita,

ऋतु बोड़ीगे चौमासा,
डांडयों बासिग्ये हिलांसा.
रौड़ी दौड़ीक् सार्यूं बीच,
मैनू एैग्ये बल चौमासा.

नैल्ये गोडें मा लगि भग्यान,
क्वोदा झंगोरा कि सार्यूं मा.
बरखा मा लरतर रुझीक्.
बैठि पंय्यां डाली  नीस मा.
डांडी कांठ्यों कु छिफुलु बाटू.
झपन्याली डाली रंयासा,
रौड़ी………………बल चौमासा.

साग सग्वाड़ी लगुल्यों कु झालु,
धुरपला एैंच पोंछ्यूं चा,
सौंला काटीक दादी कु कफलू.
चुल्ला मा थड़कांयू चा.
लैंदी भैंसी छांच छ्वोले,
नौंण खयोलु जरा सा.
रौड़ी………….बल चौमासा,

गाड गद्न्यों कु सुर्याट,
बल छाला मच्छवें का ठाट्
काखड़ी मुँगरी भी भक्ख लगी,
जक्ख स्कूल्यों कु बाट.
भ्येंटि औला दयो-धियांण,
भतूज भांदो का मासा.
रौड़ी………..बल चौमासा 

ऋतु बोड़ीगे चौमासा.
डांड्यों बासिग्ये हिलांसा
रौड़ी दौड़ीक् सार्यूं बीच
मैनू एैग्ये बल चौमासा 

लेख – हरदेव नेगी

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