Sarmyalu Dog Alex – (सरम्यालू कुकूर अलैक्स)

Sarmyalu Dog Alex - (सरम्यालू कुकूर अलैक्स)

Sarmyalu Dog Alex – (सरम्यालू कुकूर अलैक्स)

मंगसीरू दिदा जब दिल्ली बटि रिटायर होकर गाँव वापस आए तो अपने साथ अपना अलैक्स डौगी (Sarmyalu Dog Alex) भी गाँव लाये, अलैक्स डौगी को मंगसीरू दिदा अपने बेटे से बढ़कर मानते थे, जैंसा दिदा अलैक्स को कहते थे वो वैंसा ही करता था, मंगसीरू दिदा का घर गाँव के चौबट्टा में होने के कारंण अलैक्स आकर्षण का केंद्र बना हुआ था जहां देखो उसकी चरा चरी चल रही थी, अलैक्स का लुक दिखने में भी बहुत बिगरैला था, काला सफेद रंग के बाल के कारण खूब बिगरैला दिखता था, अलैक्स का खाना भी बिलकुल हाइ क्लास का था वैंसा बहुत से इंसानों को भी नसीब नहीं होता था, मंगसीरू दिदा उसको पैट स्प्रै हेयर सेंपू से नहलाते थे, पैडिग्री को दूध में मिलाकर देते थे, हफ्ते में उसके लिए तीन बार चिकन लैग पीस लाते थे, एैंसा भाग्य लेकर अलैक्स इस धरती पर आया था बल, वहीं गाँव के कुछ लोग बोल रहे थे “मंगसीरू दिदा तुम्हारा अलैक्स फलैक्स कहीं बाग के गिच्चे की कोली (निवाला) न बन जाए, इसको भितर ही रखना बल रात में,………!

पर अलैक्स ने अपना जादू लगभग पूरे गाँव पर चला दिया था, जो भी बाजार से आता तो कुछ ना कुछ खठि मिठी अलैक्स को भी देता था, अलैक्स भी सबको पहचानने लग गया था बल, जो भी आता था उसको अपने अगने के खुट्टे को उपर उठाकर प्रणाम करता था, लोग उसके साथ सैल्फी लेना पसंद करते थे और अलैक्स सैल्फी लुक देने में माहिर था, गाँव के दूसरे कुकूरों को मंगसीरू दिदा अपने घर के आसपास नहीं आने देता था, उनको देखते हि ढुंग्याना (पत्थर मारना) शुरू कर देता ता, अलैक्स बिलकुल सरमीला टाइप का था, घर के आसपास बांदर, ग्वोंड़ी, बंण बिरालू, तुतर्याल जो भी आता था उनको देखकर सरमा जाता था और सीधे भीतर चला जाता था, बिलकुल मनख्यालू कुकूर था बंदर्वालू नही था जो उनको भगा दे, मंगसीरू दिदा जैंसे बाजार से आता था अलैक्स सीधे दिदा की गल्वाड़ी चाटने लगता था, और दिदा अगर कुछ ना दे तो नखरे भी करता खूब करता था अलैक्स, बंदरों को देखकर भौंकता भी नहीं था, पर अलैक्स जिस माहौल मे पला बड़ा था उसके सामने गांव का माहौल बिलकुल अलग था, अलैक्स कार, स्कूटी में सफर करने वाला था, अलैक्स के कारंण मंगसीरू दिदा के घर की रौनक और भी बढ़ जाती थी, मंगसीरू दिदा अलैक्स से अंग्रेजी में बात करते थे और वो पट बींग जाता था, उतनी अंग्रेजी गाँव के बच्चे भी नहीं बींग पाते थे जितना अलैक्स बींग जाता था, अलैक्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण गाँव के दूसरे कुकूर, शेरू, डब्बू, कालू, लल्ली, कुकुरों की लोकप्रियता घटती जा रही थी, वो बिचारे दिन भर गाँव के खेतों से बांदरो को भगाने में व्यस्त रहते थे, या फिर बकरियों की रक्षा करने में, पर लोग जैंसा प्रेम अलैक्स से कर रहे थे इनसे वैंसा प्रेम नहीं कर रहे थे।

Sarmyalu Dog Alex

एक दिन डब्बू, कालू और लल्ली बांदर भगाने जा रखे थे, वहीं एक जगह पर बैठकर तीनो ने गोपनीय मीटिंग की, डब्बू ने कहा जब से ये लेंडी अलैक्स आया है मेरा मालिक मुझे अब धै भी नहीं लगाता, कालू ने कहा मुझे तो पहले खूब छांछ शिकार मिलता था वो भी नहीं मिल रहा अब, लल्ली बोला मुझे टौफी, बंद, बासी रोटी मिलता था टाइम पर सब मिलना बंद हो गया अंदर से काफी वीकनेस फील हो रही है, डब्बू यार इस गाँव के पुंगड़ों के बंदर हम हाकें (भगाये), बकरियों की देख बाल जंगल में हम करें, नटि सटि गाली भी हम सुने, पदानी बोडी तो हमे बिरूड़ा कुकूर कहती हैं, पल्या ख्वोला की बोडी हमे लोदर कहती है, और जब भी बांदर ग्वोंड़ी आये तो सबसे पहले हमे ही भट्याती है, रात को छज्जा में रहकर घर रखवाली भी करते हैं, कभी हमने किसी के घर में दरवाजे के अंदर कदम भी नहीं रखा, जो भी बासी तिबासी मिला वो खाया फिर भी गाँव की सेवा की, और एक वो अलैक्स फलैक्स बिस्तर में सोया रहता है, सोफा में बैठा रहता, चुलड़ा पर बिरला की तरह आग सेकता है, और बंदरों को देखर गिच्ची भी नहीं खुलती उसकी, पर अब हम भी गाँव वालों को बता देगें कल से हम तीनो बंदर भी नहीं देखेंगे, बौंण बकरियों के साथ नहीं जायेंगे, अब सच्च में हम बिरुड़ा कुकूर की तरह घूमते रहेंगे, और कसम खाओ जब तक हमे हमारा हक्क नहीं मिल जाता कोई गिच्चा नहीं खोलेगा, बांदर ग्वोंड़ी साग भुज्जी कखड़ी मुंगरी खाते हैं तो खायें, हमे कोई मतलब नहीं, हम अपने खाने के लिए कुछ ना कुछ सिकार कर ही लेंगे, कालू ने कहा हम एक प्लान करते हैं, गाँव के पुंगड़े के बांदर मंगसीरू दिदा के घर तरफ दौड़ायेंगे फिर देखतें हैं अलैक्स क्या करता है,

बांदर ग्वोंडियों (लंगूर) ने गाँव में उत्पात मचाना शुरू कर दिया, गाँव की काखड़ी मुंगरी सपाचट कर दी, कुछ बांदर तो घर के अंदर भी घुस जाते, किचन से साग भुज्जि रोटी की टोकरी चुराकर भाग जाते, कुछ तो गात बिल्कने आ जाते, एक दिन उधर डब्बू कालू लल्ली मंगसीरू दिदा के घर के सामने जो गौ शाला थी उसकी धुरपलि में चड़कर पूरा तमाशा देख रहे थे लोग बुला रहे थे पर वो चुपचाप थे, मंगसीरू दिदा अपने चौक में कुछ धांण कर रहा था, अलैक्स छत में उछल कूद कर रहा था बौल के साथ, तब तक दो चार बांदर छत में कूद गये, अलैक्स क्यांयूं-क्यांयू करने लगा, ये आवाज सुनकर मंगसीरू दिदा छत की तरफ भागा, एक बंदर ने अलैक्स को पकड़ा और पेड़ के टुकने पर ले गया, अलैक्स को थपड़्याने लगा, बांदर के बच्चे उसकी पूंछ पकड़कर झूला खेलने लगे, अलैक्स सन्नि में पड़ गया, मंगसीरू दिदा ढुंगा फेंक रहा था पर वहां तक एक भी ढुंगा नहीं पहुंच पा रहा था, दिदा ने कालछ डब्बू को आवाज दी पर वो लंमपसार होकर पठाली के उपर सोये थे, गाँव के छ्वोरों को बुलाया अलैक्स को बचाने के लिए पर निरभगी बांदर ने चम्म पकड़ा हुआ था, बांदरों को डौर बिलकुल भी नहीं लग रही थी, दिदा को डर था कि कहीं अलैक्स को पेड़ के नीचे ना फैंक दें, दिदा पसीना से लरतर, गाँव एक शैतान लड़के ने दिदा क्या करना एैंसे सोपीस सरम्याले कूकूर का जो बांदर को ना भगा पाये, लैंडी है ये तो, मंगसीरू दिदा गुस्से में लाल हो गया और कहने लगा That is not Landi, That is Alex. लड़के ने कहां अग्रेंजी झाड़ने से क्या होगा, बांदर तो भगा नहीं पा रहा, बंदरों ने अलैक्स को उपर टुकने से नीचे फैंका, ये देखते ही देखते मंगसीरू दिदा बेहोस हो गया, और अलैक्स सीधे नीचे खेत में गोबर के ढेर के उपर पड़ गया, और गोबर से यकलीप हो गया, तब छ्वोरों ने उसको एैंसे हि उठाया, और मंगसीरू दिदा के पास ले गये दोनों ही बेहोस थे, कुछ देर बाद दिदा को होश आया तो चिल्ला गया कि ये क्या है, लड़को ने कहा ये अलैक्स है शुक्र करो ये गोबर के ढेर मे गिर गया, कहीं और गिरता तो वहीं पर खड्या देते अलैक्स को. जैंसे अलैक्स को भी होश आया वो थर थर थतरा रहा था,  सरम्यालू कुकूर, (Sarmyalu Dog Alex)
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अब गाँव के छ्वोरों को भी अक्ल आ गयी थी कि अलैक्स एक सोपीस डौगी है, खामखा उसको सर चड़ा रखा था, एैंसे मधख्याला कुकरों का क्या करना जो बांदर ही न भगा पाये, अपने डब्बू कालू लल्ली ही ठीक हैं, कम से कम बांदर ग्वोंड़ियों को भगाने में माहिर तो हैं, फिर गाँव के सभी छ्वोरो ने तीनो कूकरों को आवाज दी और बंदरों को भगा दिया,

गौं कु कुकूर मनख्यालू कम बंदर्वालू ज्यादा होंण चैंद बल,

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