“गात पीड़ा”

Hasya Vynag,

वो जमाना गुजर गया जब हम उत्तराखंड के लोगों के “गात” में पीड़ा होती थी या हमको “जौर” आता था……….अब हमें “Body Pain” होने लगा है या हमको भी “Fever” आने लगे हैं।………………! “Fever” तो अब हमें ऐंसै आने लगा है जैंसे देबता आ रहा हो और हमारे Body में काफी “थतराट” होने लगता है पर जब काफी Medicine (दवाई) खाने के बाद भी हमारा Body Pain कम नहीं होता और Body में “थतराट” और हो जाता है तो तब इस तरह के हाल देखकर हमें गांव का “मसांण” याद आता है जिसे हम पूजना भूल जाते हैं, और जिसको पूजने के बाद ही हमारा Body Pain कम होता है…………………!

“पीठी पीड़ा” भी अब कम कम ही होती है, ज्यादातर हमें Upper or lower Back pain होने लगता है जिससे ऊंठड़ बैठंड़ मा कभी कबार “पीठी” झसक पड़ जाती है और जिसका असर हमारी “धौंणी” तक तो नहीं पर Neck तक जरूर होता है. फिर “धौंणी” को यनै तनै म्वोड़ने में काफी Pain होता है।।।।। अब तो हमारे “क्वगंले गाल” भी ठंड से नहीं फटते ना ही हमारी Skin “तेल्वाण्ंया” होती है…………”””….. अब तो बल हमारे Face Soft Cheek की skin ठंड से Crack व Oily होने लग गई है. ख्वोटा मुड़ने के बाद Pain को कम करने के लिए “ताला मारने” की परंपरा भी अब तो सपा हरच ही गई बल अब “Ankle Bend” होने लग गया है और Sprain कम करने के लिए अब हमे भी ताला मारने की जगह Ankle Neoprene Sleeve (गरम पट्टी) जरूरत होने लगी है………………!……….!

पर जैंसे-जैंसे गात पीड़ा हम उत्तराखंड के लोगों से निपट गया है और “ताड़ी-फाड़ी” कम होने लग गई वैंसे ही एक दिन ये Body Pain का रोग भी निपट जायेगा और सभी स्वस्थ्य रहेंगे.

लेख – हरदेव नेगी

6 thoughts on ““गात पीड़ा””

  1. खित खित खित
    पढ़ी ते रिंग होने लग गयी भौत सुंदर

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