एक हसीना था!

कॉलेज का पहला दिन बहुत से नये चेहरों से रूबरू करवाता है, अलग अलग मिजाज और रंग रूप भाषा देखने व सुनने को मिलता है, आँखें नये दोस्तों को तरासती है, पर हर कॉलेज में कोई एक खास होता है, उसकी एक अलग पहचान होती है, वो निराली नहीं निराला होता है, वो महबूब नहीं दिलों पर राज करने वाला हसीना होता है, क्योंकि वो चमेली नहीं चमेलू होता है. वैंसे तो लड़कियां तिरछी नजर का इस्तेमाल करने में शतप्रतिशत माहिर होती हैं पर जब ये गुंण किसी लड़के में आ जाए तो, समझ लो कि वो वो होने कि कगार पर है जो उसे नहीं होना चाहिए था. बात है 2012 की जब कॉलेज का पहला दिन शहर की धरती से एक चमेलू श्रीनगर गढ़वाल की धरती पर पढ़ने आया, थुल थुल सा शरीर उसका पहाड़ जब चड़ा तो श्रीनगर में  प्लेजर स्कूटी ने उसका भार सबसे पहले उठाया, कालेज के पहले दिन ही इम्प्रेशन जमाने जब वो अपनी स्कूली लेके चौरास पुल पर पहुँचा तो उसकी धड़कने और बढ़ने लगी,उस संकरे से पुल पर ही उसकी नजरें इतराने लगी, अक्सर फिल्मो में जब किसी हीरोइन का दुपट्टा हीरो की घड़ी पर फंसता है तो हीरो का दिल फिसल जाता है और फिर नई कहानी शुरू होती है, यहाँ भी कुछ एैंसा ही हुआ पर यहां लड़की का दुपट्टा घड़ी से नहीं बल्कि, चमेलू की स्कूटी एक हेंडसम बाईक वाले के कांरण चौरास पुल पर फंस गई थी….

जब उस तीन फुट चौड़े पुल पर चमेलू जैंसे शरीर वाले की स्कूटी फंसी तो लड़का होकर उसने गाली नहीं दी, बल्कि लड़कियों की तरह आऊच कर दिया, फिर क्या था उस दिन से वो आऊच का माऊच-माऊच हो गया. जैंसे तैंसे करके जब उसकी प्लेजर स्कूटी कैंपस पहुँची, तब जा कर उसने चैन की सांस ली. बैठा तो वो फस्ट सीट पर था पर आंखे उसकी क्लास में किसी को ढूंढ रही थी, पहले तो सब ठीक था लेकिन जब प्रोफेस ने कुछ फनि (Funny) सा कमेंट किया तो वो खुल के नहीं हंस रहा था लड़को की तरह बल्कि लड़कियों की तरह मुह पर हाथ रखकर हंस रहा था. उसके गेस्चर (Gesture) में एक अनोखा बदलाव था क्योंकि वो कॉलेज का एक एंटीक पीस था. पर क्लास में उसकी आँखें जिसे ढूंढ रही थी वो पीछे की बैंच पर बेठा था, और 80 स्टूडेंट के बीच औझल था. आखिरकार एक दो दिन में चमेलू को उसकी चमेली मिल गई. पर इस स्टोरी में जिसे स्कूटी पर होना चाहिए था वो बाईक पर था और जिसे बाईक पर होना चाहिए वो स्कूटी पर था. आज के दौर में दिल तो फीलिंग्स से मिलते हैं और ये फिलिंग किसी के साथ भी उत्पन्न तो नहीं पर अवतरित हो सकती है. पर चमेलू का आल इन वन स्टाईल सभी को जम गया आखिर दो दिलों का शूटर और मामा जी का स्कूटर दोनो ही उसको एलीगेन्ट लुक्स (Elegant Looks) देते थे.

कॉलेज की फ्रेशर पार्टी में भी नौटी नौटी (Naughty – Naughty) से लुक में जब आया तो, सबने उसको हौटी हौटी (Hoty – Hoty) कहा फिर क्या था उसका ये अनोखा अंदाज श्रीनगर की रामलीला तक झलका जहाँ उसे वानर सेना का किरदार मिला, जिस हिसाब से उसका थुल थुल जिस्म था उस हिसाब से उसे कुंभकंरण का रोल सूट करता था पर वो हनुमान का बड़ा भक्त था हर मंगलवार फास्ट रखता था, इसलिए उसे बानर सेना का मुख्या बनाया गया. वैंसे मार्केटिंग ग्रुप में लड़कियां कम ही एडमिशन लेती हैं मगर इसने कभी वो कमी होने नहीं दी, क्योंकि जिसकी चमेली मार्केटिंग में वो वहाँ चमेलू खुद बा खुद चला आया, फाईनेंस का हीरो था पर प्यार बैलेंस सीट की असली एैंट्री मार्केटिंग में थी. जब दिल बिना डैब्ट (Debt) के ही परफैक्ट मैच हो रहा हो तो फिर प्यार में डबल एैंट्री (Double Entry) की क्या जरूरत है. पर उसका चमेलू का प्यार सेमेस्टर की तरह बदल गया था वो पहले साल जिसके चक्कर में स्कूटी फसी फाईनल होती है कोई और बुलट की आवाज की तरह दिलक धड़का गया और चमेलू  बुलट से कहीं और इतराने लगा, और यहाँ चमेली का दिल इनवेस्टर (Investor) की तरह घबराने लगा क्योंकि अब उसका (Attitude) ऐटिटयूड सेंसेक्स की तरह बढ़ने लगा, और धीरे धीरे चमेलू का दिल ब्रोकर की तरहा अपने भाव बदलने लगा, और एक दिन उसने चमेली का दिल भी दिवलिया हो गया. शायद वो भी एम बी (MBA) का मतलब समझ गई थी (My Bestie Ammi) माई बैस्टी एैमी.

5 thoughts on “एक हसीना था!”

  1. Hahaha…. When I read the story, it framed a picture in front of me. Outstanding work once again. Keep it up hardev ☺☺

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