Dear Hotelier Bhaiji – डियर होटलियर भैजी,

Dear Hotelier Bhaiji डियर होटलियर भैजी,

डियर होटलियर भैजी, खांणों मा क्या धंणि नि बणौंदा तुम जी, देसू परदेसू का मनखि गुंण गांदा तुमरा खांणों का, बल् स्वाद यन्न लगदू जन दाली मा जख्या कु तुड़का, क्वै सुद्धि त् क्वै पढ़ी लिखी ग्यैन होटल लैन मा, खैरी विपदा जु भि भ्वोगी अन्वार चमकींणी रै मुख मा, कुछ अपणै पहाड़ी भै बंदौन यन गलदारी का सौं खवैन, सैफ कि नौकरि का बाना हम मु भांडा धुवैन, भांडा ध्वैकि हमुन अपड़ा सुखि दिन लुकैन, तू-ता-रे जन भाषा हमथैं चुभीन, कर्ज पात करिक तैं बीजा बिदेश जांणा कु आई, बिरंणा माटा मा भि हमुन उत्तराखंड कु डंका बजाई, इटली, फ्रांस अमरिका दुबई हो या मस्कट, सभि जगा मनख्यों कि रैंदि हमरा खांणौं पर टक्क, काली पैंट सफैद कमीज अर् काली टाई चा हमरु पैरवार, सभि जगा मनख्यों से अलग लगदी हमरि अन्वार, डियर होटलियर भैजी सच्चि बतौं तुमरि एक बात, यन्न क्या जादू चा तुमरा तौं हाथ, कस्टमरू थैं तुमुन बन -बनि कु सवदू खांणु खिलैई, मालिकै गाली सूंणी तुमरि भूख मिटि गैई, दिन भर मैस अर् हाऊस किपिंग मा लग्या रौंदा, ब्वे बाबु याद जब भि औंदी वीडियो कौल का सारा मुख दिखौंदा,…………..!

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डियर होटलियर भैजी (Dear Hotelier Bhaiji) तुम खुंणि हरच्यां बार-तैवार, तुमथैं खुद पता नि चा कि कब जौला तुम अपड़ा घार, गौं ख्वौला यखुला छोड़या तुमरा नौना नौन्याल, लग्या रौंद सिभि तुमरा घर औंणें जग्वाल, तनि गरीबी की लाचारी तनि यू पहाड़ू कि बिरोजगारी, द्वी पैंसों का बाना बिरणां मुल्क मा ज्वानि खत्यैंणी तुमारी। गौं का मौल्या-थौला रूठिनि होलि बग्वाल, कभि नि भैंट्या तुमुन सि अपड़ा देबि-धुयांल, बड़ा मुश्किल से घौर का हालत सुधरि छा, ब्वे बाब अपड़ा दुःख आंसू प्वौंजड़ा छा, कर्ज पात निपटै मुखड़ा तुमरा खिलगैनी, जिकुड़ु भी धौ लगौंणू कि अब राजि खुशि का दिन बौड़ि एैग्यैनी, पर तुमरा यूं खुशि का दिनू पर न जांणि कैकि लगि ह्वेलि नजर, जन सूंणि कोरोना वायरस की खबर, सैरि दुनिया कन्न ह्वेगि लाचार, बंद व्हेगिन सभि जगू का होटल बजार, तुमरि खुश्यूं को भांडू चूंण लैग्ये, जु रोजगार एै छो हाथ सु भि फुंड सरकि ग्ये, आंख्यूं बटि बगड़ लैगि आँसू की पंणधार, कोरोना महामारी लूछिगे तुमरु हाथो रोजगार, …..!

क्या सुपिन्या देखि छा क्या ह्वेग्ये आज, अब ईं बेरोजगारी मा कनक्वै चललू घर कु काज, निरभगि ज्वोग सदानि हमथैं यनि राइ, क्या पै पढ़ि ल्यैखि थैं क्या हाथ हमरा अब आई, बरसू की मेहनत कु फल कुजांणि कख हरचि ग्ये, यु कुरोना सब कुछ हमरु लूछिग्ये, अब क्या खौला क्या हम पकोला, अब कै मु अपड़ी खैरि विपदा लगौला, लाखों उत्तराखंड होटलियर व्हेगिनि बिरोजगार, क्या हमारु सुध ल्यौली हमरि या सरकार,
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जु हम सभ्यूं थैं खांणू खिलौंदा छा अब हमरै खांणा लाला पड़यां चा, अब हमरि खुश्यूं कि झौल बुझिग्ये, अब सैरू सुपन्यों कु स्वाद बेस्वाद व्हेग्ये,

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लेख :- हरदेव नेगी

You Tube Video by –  RJ Roshni Khanduri 

 

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