Dear घस्यारी

Dear Ghasyari,

तुम हो एक साधारंण नारी,  ना कोई चेहरे पर Make-up, ना कोई Dressing Sense, ना अच्छी हिन्दी बोलनी आती है ना ही कुछ Modern खाना पकाना, बेमतलब तुम दिन भर घास पात के चक्कर में पड़ी रहती हो और गौं गुठ्यार गाजी पाती की बात करती हो, भला इस जमाने में गाजी पाती करने से क्या होता है। तुम्हारी Life का कुछ मकसद नहीं है। ना घूमना फिरना। ना मौज मस्ती। ना Kitty party ना किसी प्रकार का कोई Swag. तुम क्या जानो Body Deo की खुशबू….तुम्हारे गात पर तो गोबर की बदबू ही अच्छी लगती है, मैं तो कहता हूं कि तुम क्यों ये गाय भैंस पालती हो। वैंसे भी आज कल पैकेट के दूध में ज्यादा ताकत होती है। और तो और Born -Vita से बच्चों का दिमाग ज्यादा तेज होता है और वो दुनिया से Compete भी कर पाते हैं।………………! 

तुम्हारे बनाये हुए दूध की बाड़ी और क्वोदा झंगोरा की रोटी खीर में वो ताकत अब कहां। तुम्हारे इन पुराने ब्यंजनों से पले हुए बच्चे आज के जमाने में Out of Fashion की तरह हो गये हैं! वो क्या जाने Modern life का रहन सहन खाना पीना। तुम्हारे बनाई हुई चूल्हे की चाय में खिटांण आती है बल और वो धुवंण्यां सी लगती है, अब तो मैं पैसें वाला हो गया हूं और स्वाद तो Cafe Coffee के गिलास में भरपूर मात्रा में है। हौल(हल)लगाने के दिनों में तुम बेमतलब की रोटी भुजि साफे में लपेटकर पुंगड़े मे लाती हो जिसमें धूल और पता नहीं क्या क्या कीटांणू मिल जाते है, तुम्हे क्या मालूम हल्दीराम और बिकानेर की बनबनी साग भुजी का स्वाद।।। तुम तो दिन में वो अल्वांण्या खाना पकाती हो जो घलत्यांण्या हो जाता है।और तुम्हारी साड़ी और लव्वा पहनने का Fashion अब कहीं चलता नहीं है ना जचता है। तुम तो कभी कबार लोकल बाजारों और मेल्या थौलों मे कपड़े व अन्य सामान खरीदते हो, जो शहर के Shopping Mall और Fashion Retail Outlet के सामने तो बिलकुल भी नहीं टिकते और कैंसे कपड़े पहनने हैं उसका ढंग भी सिखाया जाता है।, तुम तो हो ही एक घस्यारी और घास काटने वाली, कभी आ जाओ शहर की तरफ कैंसे जिंदगी काटनी है ये तुम भी सीख जाओगी Dear घस्यारी।।।।।

लेख- हरदेव नेगी

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