गढ़वाली व्यंग्य

Sarmyalu Dog Alex – (सरम्यालू कुकूर अलैक्स)

Sarmyalu Dog Alex – (सरम्यालू कुकूर अलैक्स) मंगसीरू दिदा जब दिल्ली बटि रिटायर होकर गाँव वापस आए तो अपने साथ अपना अलैक्स डौगी (Sarmyalu Dog… Read More »Sarmyalu Dog Alex – (सरम्यालू कुकूर अलैक्स)

Dear Hotelier Bhaiji – डियर होटलियर भैजी,

Dear Hotelier Bhaiji डियर होटलियर भैजी, डियर होटलियर भैजी, खांणों मा क्या धंणि नि बणौंदा तुम जी, देसू परदेसू का मनखि गुंण गांदा तुमरा खांणों… Read More »Dear Hotelier Bhaiji – डियर होटलियर भैजी,

“बस बींग जाते हैं पर बच्या नि पाते”

जब बटि हम् पहाड़ियों की चकमंद यूं शहरू की काख् ह्वे. वें दिन बटि हमरा गिच्चा बटि गढ़वलि व कुमाऊनी भाषा बिरांणी ह्वे. या बात… Read More »“बस बींग जाते हैं पर बच्या नि पाते”

Dear नयी-नयी ब्योंली

Dear नयी-नयी ब्योंली, जरा मुखड़ी दिखा बल् कन्न स्वांणी ह्वेलि. नई ब्योंली कु डोला जनि चौक मा आई, देखदारों की धौंड़ी लम्बी ह्वे ग्याई। गौं… Read More »Dear नयी-नयी ब्योंली

तीन रंग उत्तराखंड का पहाड़यों का

ना त् कभि देखि, ना त् कभि पच्छांणी, बल कन्न हौन्दा ई पहाड़ी. यूं कु क्या रूप रंग हौन्दू। यू कु सुभौ सग्वोर् कन्न हौन्दू,… Read More »तीन रंग उत्तराखंड का पहाड़यों का