गढ़वाली कविता

Corona garhwali kavita

Corona Garhwali Kavita -कोरोना मामारी अर ​सरकारे कुव्यवस्था

Corona Garhwali Kavita – कोरोना मामारी अर ​सरकारे कुव्यवस्था. ये बगतन भी बीति जांण, अबार जु कैकु साथ द्योलू, वेका गुंण सभ्यून गांण. ईं कोरोना… Read More »Corona Garhwali Kavita -कोरोना मामारी अर ​सरकारे कुव्यवस्था

garwali kavita badaang by hardev negi

गढ़वळी कविता बणांग (Garhwali Kavita Badaang)

गढ़वळी कविता बणांग (Garhwali Kavita Badaang) रितु बसंत का दिनू मां, बणांग लगी चा डांडी कांठ्यों मा, कनक्वे खिलला रंगीला पिंगळा फूल, डाळी बोट्यों कि… Read More »गढ़वळी कविता बणांग (Garhwali Kavita Badaang)

कुछ तुमुन

कुछ तुमुन फरकै, कुछ मि फरकोलु. कुछ तुमुन सनकै, कुछ मि सनकोलु. कुछ तुमुन चितै, कुछ मि चितोलु. कुछ तुमुन बिंगै, कुछ मि बिंगोलु. कुछ… Read More »कुछ तुमुन

ऋतु बोड़ीगे

ऋतु बोड़ीगे चौमासा, डांडयों बासिग्ये हिलांसा. रौड़ी दौड़ीक् सार्यूं बीच, मैनू एैग्ये बल चौमासा. नैल्ये गोडें मा लगि भग्यान, क्वोदा झंगोरा कि सार्यूं मा. बरखा… Read More »ऋतु बोड़ीगे