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Dear नयी-नयी ब्योंली

Dear नयी-नयी ब्योंली, जरा मुखड़ी दिखा बल् कन्न स्वांणी ह्वेलि. नई ब्योंली कु डोला जनि चौक मा आई, देखदारों की धौंड़ी लम्बी ह्वे ग्याई। गौं… Read More »Dear नयी-नयी ब्योंली

तीन रंग उत्तराखंड का पहाड़यों का

ना त् कभि देखि, ना त् कभि पच्छांणी, बल कन्न हौन्दा ई पहाड़ी. यूं कु क्या रूप रंग हौन्दू। यू कु सुभौ सग्वोर् कन्न हौन्दू,… Read More »तीन रंग उत्तराखंड का पहाड़यों का

सौंगू दिख्येदूं

सौंगू दिख्येदूं पर ठुक एैंच आगास चा, ये गौं का बाटा कु……….! पय्यां डालि किलै सूख्यूं चा……….। घस्येनू कु आढासु छों जैंका छैल् स्कूल्या दगड़यूं… Read More »सौंगू दिख्येदूं

अन्वार

स्वांणी मुखड़ी फ्योलीं जन चार। कजर्याली आंखी जन ब्वे की चार। जिदेर जिकुड़ी अर् बालू मन। सच्ची ब्वोला! कैंकि ह्वेली ईं पर अन्वार।    … Read More »अन्वार

गढ़वाली कविता “टेक्वा”

मेरि जिंदगी कु घाम अच्छलांण लैग्ये। अंधेर संगती बिंरयूं चा, उंदार तरीक उकाल छौं जांणू। अब ये टेक्वा कू सारू चा. नांगा खुट्यों हिट्यूं मि… Read More »गढ़वाली कविता “टेक्वा”