बिल कु समर्थन

Bil ku Samarthan – बिल कु समर्थन

वैंसे तो वर्तमान में मेरे खुटा अलझाने (शादी की बात)के लिए लोकसभा में बिल पारित –Bill Ku Samarthan–  करने पर विचार किया जा रहा है, और बिल पास करने के लिए कुल पुरोहित रिश्तेदार भी अपनी बौद्धिक शक्ति का पूरा जोर लगाये हुए हैं, बैसाख के व जेठ के ग्रीष्मकालीन सत्र में भी इस पर एक बार चर्चा हुइ मगर क्वारंटीन होने के कारंण बिल पारित न हो पाया, रोज ब्यखुनि (शाम) चुलड़ा आग सेकते वक्त यह विषय चर्चा के लिए लाया जाता है, पर अभी तक चर्चा मे ही है, लोकसभा के नये सदस्य खासकर – मेले चाचा की छादी में जलूल जलूल आना” वाले सदस्य कुछ ज्यादा ही उत्साहित है, उनको पता नहीं है उनके इस तोतले पन की वजह से शादी के बाद हैंसदा खैलदा बैख की जिंदगी के तोते उड़ जाते हैं…….!
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बग्वल्यों के समय ही जैंसे गाड पार और गाड वार ढोल दमौ की धुन लोकसभा के कानों तक गूंजने लगी, तो सबके मन में कबलाट होने लग गया, और फिर विषय जोर शोर से चर्चा में आने लगा, और किसी जणंदार नामक व्यक्ति द्वारा पिंडर घाटी से बिल का प्रस्ताव (कुंडली / टिपणूं) लाया गया, और मंगसीर के महीने यह बिल लोकसभा से पारित भी हो गया, जैंसे ही बिल राज्यसभा में पहुँचा तो कुल पुरोहित ने होने वाले नये राज्यसभा सदस्य की कुंडली में कुछ दोष बताया, कि बल एक ग्रह लड़के की कुंडली से ज्यादा है बल, इतना सुनते है जिकुड़ा मे मेरे जरा सी स्येली पड़ी, पर लोकसभा के सदस्यों को इस बार भी हताशा ही हाथ लगी.
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पर मेरा कहना भी यही है कि कन्या राशि होने से क्या फायदा जब राशि में कन्या है हि नहीं, फोन में सेंटिग होने से क्या फायदा जब जिंदगी में सेटिंग है ही नहीं, मैं ही वो मनखी हूँ जिसका पतणू भी सिंगल है,
अब पूस का महीना आने वाला है तो इस पर चर्चा नहीं होगी पर मकरैंणी से ये बिल फिर सदन में चर्चा के लिए आयेगा,
पर मेरू जिकड़ू कहता है कि बैसाख 2021 में बिल पारित होना चाहिए, किलै कि अभी कुछ “इच्छा” ही नी ब्वनी.
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बाकी सब छन्न ब्वना कि कब कनू, कबार कनू,
माराज कै पर चा बल तलवार लटकी,
क्वै छन्न ब्वोना कखि ऊंद फुंड क्वे पसंद त नी,
तन भी आजकल्या नौनू तैं असंद (पसंद) कु रोग चा लग्यू,
कुजांणी तब, ज्यै करला,
बुड्या मनख्यों भि अलग है स्वैग चा करयू,
बगत पर ब्यो व्हे जो अर झट नाती नतेणां भि होंयां चैंदन बल.
उमर कैन देखि,
भले लैंणा गैबणां ज्वोग ना हो पर, सासरा सभी लग्यां रौंद कि कभि ना कभि ग्वोरू सच्चि नि ब्यालू
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दादी ब्वनि कि ब्वारी कबार ल्यौंणू बल, मिन भि ब्वलि कि दादी ब्वारी नि ल्यौंण नौनी ल्यूंण, सुद्धि कैकी ब्वारी ल्यौंण,
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पर मि छौं ब्वनू कि
तातू दूध गिच्चु फुकैंद,
ना थुकैंद, ना घुटैंद
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लिख्वार :- @ हरदेव नेगी

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