Bhartu Ki Bwari – Santa Claus Devta ka Thaan – भरतु की ब्वारी – सांता क्लॉज देवता का थान (भाग – 2)

Bhartu ki Bwari - Santa Devta ka thaan by Pahadi Blogger

Bhartu Ki Bwari – Santa Claus Devta ka Thaan – (भरतु की ब्वारी – सांता क्लॉज देवता का थान भाग – 2)

भरतु की ब्वारी ने तीन साल पैली सांता देवता को देरादून में अपने कुल देवता के साथ ही स्थान दे दिया था, और यह भी तब देना पड़ा जब क्रिसमस डे भरतु की ब्वारी ने सांता क्लौज की मूर्ति घर में रख दी थी, तब सांता क्लॉज देवता ओतरा ओतरी मचा दी थी और घर मे स्थान मांगा था, तब पंडित सिम्वाल जी ने जोण जंत जुगण जंत करके सांता क्लौज देवता को शांत करवाया, और उस बगत सांता क्लॉज देवता को थापने में भरतु के 15000 रुपये व पूरा कोटा लग गया था. सांता क्लॉज मूर्ति थापने के लिए बकायादा भरतु छुट्टि भी आया था, भरतु की ब्वारी क्रिसमस डे अब हर साल धूम धाम से मनाने लगी, पहले भरतु नवरात्रों व गाँव में देवता नाचने पर जो छुट्टि लेता था, अब ब्वारी के कहने पर क्रिसमस डे व गुड फ्राइडे पर छुट्टि लेने लगा.
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जब से भरतु की ब्वारी ने सांता देवता को घर में रखा तब से भरतु की ब्वारी देहरादून के एक चर्च में सांता देवता की प्रेयर सीखने जाने लगी, शुक्रवार और रविवार हर शाम को जाती थी, सांता देवता की प्रेयर भरतु की ब्वारी समझ नहीं पा रही थी, फिर गिच्ची टपट्याती रहती थी, अब बच्चों को यूट्यूब से पर सांता देवता के भजन सीखने को बोलती थी, भजन भी अंग्रेजी में थे तो बच्चे पट सीख गये, बच्चे भी मां के साथ बाकी दिनों हाथ में मोमबत्ती लेकर प्रार्थना करने लगे, पर जब भी अपने इष्ट देवता की पूजा करती थी तो तब भजन बूफर पर बजते थे, मगर भरतु की ब्वारी और उसके बच्चों को आजतक कभी हिंदी भजन तक याद नहीं हुए, गढ़वाली तो दूर की बात है, पर संगरांद के दिन जो कुछ भी देवता का परसाद और दक्षिणां सिम्वाल पंडित को जाती थी वो बंद हो गयी, अब यह भैंट चर्च के पादरी को डोनेट होने लगी, अर सिम्वाल जी भी समझ नहीं पा रहे थे कि भरतु की ब्वारी किसी भी बार त्येवार पर पूजा क्यों नहीं करती होगी? पैली तो महीना मा द्वी बार कीर्तन भी होता था, गुसांई जी और बिष्ट जी भी कीर्तन में खूब ओतरा ओतरी करते थे, पर क्या व्हे व्होलु, सिम्वाल जी के दिमाग मे बैम होने लगा कि कहीं किसी और ने म्येरी बिरती बाड़ी तो नहीं हथ्या ली, सिम्वाल अब हर मंगलवार और शनिवार को द्वोब रहने लग गये, पर हाथ कुछ नहीं लगा, भरतु भी अब सिम्वाल जी को पहले की तरह फोन नहीं करता था. सिम्वाल जी की जिकुड़ी झस्स हो रखी थी, पर भितरा भितरी सवाल कर रहे थे कि म्येरा बिगर कनक्वै व्होलि पूजा, मि भि देखुलु।
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पर जैंसा सिम्वाल जी ने भितरी भितरी सवाल किया तो वैंसा ही होने लगा, उधर भरतु की ब्वारी आजकल रात अधिरात में सोते वक्त जोर से भट्याती रहती थी, और अंग्रेजी में बड़बड़ करती रहती रहती थी, सुबरे जब बच्चों ने पूछा कि आजकल रोज रात को Take me out and build my church,  बार बार किलै बोलती हो, हमरी निंद खराब हो जाती है, भरतु की ब्वारी ने बच्चों को समझाया कि तुमने सपना देखा होगा, एैंसा कुछ नहीं है, खैन खांण मि, द्वी-द्वी देवता हैं भीतर थाप रखे. दूसरी तरफ भरतु भी ड्यूटी पर रोज रात अर दिन में भी ओजाण मारता था और आदेस भट्याता था अर् बोलता था कि या मैं रौखा भितर या ये सेंटा फैंटा तैं रौखा भितर, भरतु के दगड़या भी परेशान हो गये थे कि अचानक आजकल एैंसा क्या हो गया, कहीं कश्मीर की घाटियों में किसी ने छल्ल तो नहीं दिया. वहीं भरतु की पलटन में चमोली के एक सुबेदार रहते थे जिन पर भेरू भी आता था, एक दिन उन्होने भरतु को अपने क्वाटर पर बुलाया. और जब सुबेदार साब पर देवता आया तो देवता ने कहा, यु क्वे कश्मीर फुंडो छौल नी, यु तुमरु देरादूंण जु कुल देवता थाप्यू यु सु चा, तुम येथे भूलिगिन, ये कि क्वे नी पूछणूं, यन करा उचांणू निकाला, घौर जैं थें चार महानी भितर समाधान कर दीन्या, भरतु ने कहा कन समाधान माराज – या ये तैं भेर थापा या जु हैकु देवता भितर चा वे तैं भेर थाप द्या, अर अपणा देवता थैं बिसरा ना, यु तुमरू पुरखों कु देवता चा, ये भूल जाला त् क्वे सुखि पर नि रौंण्या,
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भरतु ने देरादूंण अपणी ब्वारी को फोन किया और पूरी बात बताइ, उधर भरतु की ब्वारी ने भी बताया कि आजकल रोज रात को बच्चे मैं भी भट्याती हूं बच्चे बोल रहे थे “Take me out and build my church, भरतु ने कहा कि उच्यांणू निकाल कर रख अगले महीने छुट्टि आकर सिम्वाल जी से जांच पूछ करता हूँ।
उधर भरतु के छुट्टि आने से पहले भरतु की ब्वारी चर्च के पादरी के पास गयी और पादरी को पूरी व्यथा बतायी, पादरी ने कहा कि एैंसा करो सांता क्लॉज का एक छोटा सा चर्च अपने घर में अलग से बना दो, then everything will be fine, होली जल छिड़कर अपनी बात रख दी,
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छुट्टि आते ही भरतु ने सिम्वाल जी को घर बुलाया तो सिम्वाल जी ने भी पट्येली के कहा कि बल आज कैंसे लगी तुमको मेरी खुद, भरतु ने कहा कि सिम्वाल जी तुमको कैंसे भूल सकते हैं, उसके बाद भरतु और उसकी ब्वारी सिम्वाली जी को सारी राम कथा बथायी, सिम्वाल जी भी खानदानी जंणदार व जागरी थे, जैंसे उच्यांणू देखा तो भरतु को बोला, कि तुमरा भीतर जो द्वी द्मबतों की मूर्ति थपी चा तौंका ग्रह आपस मा लौड़णां छन्न, द्वी मा बटि एक थैं घोर से भेर मंदिर बणौंण पणलू, तब जैं थें द्वी सांत व्होला, सिम्वाल जी कि बात सुनते ही भरतु पैली बार अपनी ब्वारी पर बाग बना, और ब्वोला क्या जरुर थी वो सेंटा फेंटा भितर रखने की, तूने मेरी जिंदगी नचा के रख दी हो बन सांता फांता, त्येरा बुबा का छन्न का रुप्या दीन्या, बणि आइ सेंता वाली अब थाप थैंते अपणी बाबू कि कुड़ि मा, सुद्धि नि ब्वोदा ” घर ख्वे घर कुड़ि अर बौंण ख्वे बौंण कुड़ि”, इतना सुनते ही भरतु की ब्वारी पर सेंटा ओतरने लगा, फिर वही कहने लगा जो रात को भट्याता था “Take me out build my church” सिम्वाल जी ने पैली बार भरतु को डांटते देखा, पर सिम्वाल जी ने दोनो पर गौंत छिड़का अर भरतु और उसकी ब्वारी को शांत करने की कोशिश की, सिम्वाल जी ने अपनी ख्वोपड़ी घुमाइ अर भरतु और उसकी ब्वारी को समाधान बताया कि, ऐंसा करो कि रेडीमेड चर्च बनवा लो और उसको अपने छत्त के एक छोर में रख दे क्वोंणा पर द्वी तीन हजार कि बात चा, पर अपणु देबता भेर रखलु त् पचास साठ हजार, लग जाली, तांचुलि बैसाख मा एक दिन कु पाठ करी तैं द्वी द्यबतों कु ग्यमट्यम कर द्यूला, सिम्वाल जी ने कहा कि ज्यादा देबतों का चक्कर भी ठीक नहीं है, अपड़ा कुल देवता थैं पूजा सु भलु चा, कै दुसरा धर्म का देबता थैं हाथ जोड़ा पर भितर ना ल्या, इतने में भरतु ने कहा अरे सिम्वाल जी मैं कहां लाया मैं तो कुल देबता ही पूजता हूँ, वो तो इसकी गलती है देखा देखि के चक्कर में मौं कुड़ि बरबाद कर देगी.

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पहला भाग पढ़ने के लिए फेसबुक पर  ” भरतु की ब्वारी पेज पर जायें

लिंक :-  Bhartu ki Bwari

लेख:- हरदेव नेगी

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