अबकी बारी भरतू की ब्वारी

Bhartu Ki Bwari - Pahadi Blogger

 

नामांकन की खींचा तांणी के बाद अब भरतु की ब्वारी चुनाव प्रचार की रौ भौ में लग गई. और प्रधान का चुनाव प्रचार भी प्रधानमंत्री के चुनाव प्रचार के बराबर करने की बत्ती उसके दिमाग में जगी. अब जब गौं की सब बेटी ब्वारी, ज्वान बुड्या मनखि दिन भर फेसबुक पर ओनलाईन रहते हैं तो भरतु की ब्वारी सोशल मीडिया तक अपने प्रचार के खुटे पसारने की सोच रही थी. फिर उसने अपने दिल्ली वाले एक दयूर को फोन किया जो आई टी कंपनी में ग्राफिक डिजाईनर था उससे अपने पोस्टर बनाने को कहा और द्वी चार प्रचार प्रसार वाली लाईन भी उसमें लिखने को कहा, बाकी दयूर जी सेवा पांणी तुमरी तुमरा भैजी कर दयूला. आखिर दिल्ली वाले दयूर ने भरतु की ब्वारी का एक पोस्टर बनाया और उसमें एक पंक्तियां लिख दी “ अबकी बारी बल् भरतु की ब्वारी”. और गाँव के पंच देवतो का ख्याल रखकर उपर की तरफ उनका नाम भी लिखवा दिया… .. . …….!……..

अब भरतु की ब्वारी ने ये पोस्टर सभी जगह शेयर कर दिया और सबको टैग कर दिया, जब ये पोस्टर धर्मू की ब्वारी के पास पहुँचा तो उसके दिमाग भी चल-बिचल होने लगा, धरमू की ब्वारी के दिमाग में एक खुरापात खटक गई और उसने भी एक प्रिंट वाले भैजी को फोन किया और चार पाँच पोस्टर बनाने को कहा, फिर क्या था जैंसे ही पोस्टर बना धर्म ने वो पोस्टर चुपचाप रात के समय मथै ख्वोला, पल्या ख्वौला, गौं की धार व पांणी के धारे वाली दीवार पर चिपका दिए. अगली सुबह जैंसे ही गाँव के लोग कोई बाजार, कोई पांणी का धारा व कोई साटी मांडने जा रहा था तो सबने जब ये पोस्टर देखा तो वो हक्क बक्क रह गये. और उनका सक्क भरतू की ब्वारी पर चला गया क्यूंकि सबसे पहले गाँव में ये पोस्टर वाला फैसन भरतू की ब्वारी ने चालू किया था, और कल ही शेयर भी किया था.वहीं गौं के सरपंच ने भरतु की ब्वारी को फोन कर दिया और कहा बल ब्वारी तुम देरादूंण से यहां गाँव में भाई बन्दी तोड़ने आ रखे हो बल, ये देरादूंण वाली सौर यहाँ क्यूँ कि तुमने, बल जब तुमको पता है कि गाँव के चुनाव में वोट गोपनीय होती है तो तुम्हे ये खुलम खुल्ला प्रचार क्यों कर रहे. भ्वोल के दिन तुम फुंड सरक जाओगे और तुमने हमारी गाँव में निराड़ी निखांड़ी कर दी है. भरतु की ब्वारी को कुछ समझ नहीं आया न हो कि तब तक गौं महिला मंगल दल की अध्यक्ष भरतु की ब्वारी पर फारिंग हो गई. और एक के बाद एक फोन आने लग गये…………!…………..

उधर धरमू की ब्वारी मौके का फायदा उठा कर मथ्या ख्वोला गई और कहने लगी, हां हम गरीबों को कौन बना रहा प्रधान अब तो पैंसो वालों का राज है, हमुन त सदानी यनि रौंण, और एक पंच लाईन मार के चली गई. “घास काटलि ये गौं की बेटी ब्वारी, बल प्रधान बनेगी देहरादून की ब्वारी”. यहाँ धरमू की ब्वारी ने भरतू की ब्वारी को बाहरी बता दिया और ये बात सभी मथ्या ख्वोलों वाली की दिमाग में बैठ गई, बल बात तो इसने कैदे की करी है. उधर भरतु की ब्वारी को ये मुंडरा और होता जा रहा था कि बल एक ही रात में गाँव वाले मेरे विरोध में क्यों हो गये बल, पर कोई साफ नहीं बता रहा था कि गाँव में पोस्टर लगा रखे. भरतु की ब्वारी पानी के लिए गौं के धारे की तरफ चल पड़ी और जैंसे ही वहां पहुंची तो धारे पर खूब भीड़ थी, तब तक एक दयूर की नजर भरतु की ब्वारी पर पड़ी और बोलने लगा बल बौजी ये क्या चिपका रखा है तुमने, जैंसे ही भरतू की ब्वारी की नजर पोस्टर पर पड़ी उसकी मुखड़ी लाल हो गई पांणी का रीता बंठा हाथ से छट्ट छूट गया, बल ये तो मैने नहीं चिपकाया, तब तक एक बोडी ने कहा बल भरतू की ब्वारी त्वैन त् हमारी इज्जत भी नि देखी. ये तो गौं का चुनौ है त्वैने तो इसे विधायक के बरोबर का कर दिया, हमने तो गौं वोट देने के लिए बच्चे को खुकले में रख कर सौं खा रखे हैं और त्वेन यख पराल पर आग लगा दी. अब भरतू की ब्वारी समझाये पर समझाये किसे…………..

दरअसल उस पोस्टर पर वही पंक्ति लिखी थी जो कल फेसबुक वटस अप में शेयर किये गये पोस्टर में लिखी थी, और पूरे पोस्टर पर “आभार के तौर पर” गाँव के घर सभी मुख्यों की फोटो लगी व नाम लिखा हुआ था, और प्रधान के चुनाव में केवल प्रत्याशी की फोटो व चुनाव चिन्ह की फोटो लगी रहती है बस, क्योंकि गाँव का हर आदमी का वोट सबसे सीक्रेट होता हैं, अब भरतु की ब्वारी की एक और टेनशन बड़ गई, अब देखना है है कि कैंसे भरतू की ब्वारी गौं में अपनी पैंठ फिर से बैठाती है.

 

जारी:- हरदेव नेगी

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